भाकिमयू अराजनैतिक गुट ने सार्वजनिक स्थानों पर अलाव जलवाने की उठाई मांग
शमशाबाद: शमशाबाद क्षेत्र में इन दिनों गलन भरी भीषण सर्दी (severe cold) और शीतलहर का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। ग्रामीण इलाकों से लेकर कस्बों तक ठंड ने जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। अमीर-गरीब सभी सर्दी की मार झेल रहे हैं, लेकिन सबसे ज्यादा गरीब मजदूर (poor laborers) दैनिक मजदूरी करने वाले लोग और किसान प्रभावित नजर आ रहे हैं।
सुबह तड़के मजदूरी के लिए घर से निकलने वाले गरीब मजदूरों की हालत सबसे ज्यादा खराब है। मेहनत-मजदूरी कर किसी तरह दो वक्त की रोटी जुटाने वाले इन लोगों के लिए सर्दी किसी अभिशाप से कम नहीं है। सुबह से दोपहर और दोपहर से शाम गुजर जाती है, लेकिन सर्दी पीछा छोड़ने का नाम नहीं ले रही। आसमान में बादल छाए हुए हैं, भगवान भास्कर के दर्शन कई दिनों से नहीं हो पा रहे, दिन में भी घना कोहरा छाया रहता है।
शाम होते-होते कोहरा और भी घातक हो जाता है। सड़कों पर दृश्यता बेहद कम होने से वाहन ऐसे रेंगते दिखाई देते हैं, मानो कछुए की चाल चल रहे हों। दुर्घटना की आशंका भी लगातार बनी हुई है।
कृषि क्षेत्र पर भी सर्दी का गहरा असर
भीषण सर्दी का सीधा असर कृषि कार्यों पर भी पड़ रहा है। किसानों के खेतों में एक ओर आलू की फसल तैयार हो रही है, वहीं दूसरी ओर गेहूं की बुवाई और तैयार फसल पर भी मौसम का विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। कहीं-कहीं बुवाई का कार्य अभी भी जारी है, लेकिन ठंड किसानों के दैनिक कार्यों में बाधा बनकर खड़ी हो गई है। किसानों का कहना है कि खेतों में तैयार हो रही फसलों की रखवाली भी करनी पड़ती है, क्योंकि क्षेत्र में आवारा गोवंश किसानों की फसलों के दुश्मन बने हुए हैं। जब आवारा गोवंशों का झुंड खेतों में घुस जाता है तो पूरी की पूरी फसल बर्बाद हो जाती है। खून-पसीने की मेहनत, खाद-बीज और पानी पर हजारों-लाखों रुपये खर्च कर जैसे-तैसे फसल तैयार की जाती है, लेकिन अब उन पर मौसम की मार और आवारा पशुओं का खतरा मंडरा रहा है।
किसानों का कहना है कि धूप से फसलें पलती-बढ़ती हैं, लेकिन कई दिनों से धूप नहीं निकल रही। ऊपर से घना कोहरा और तुषार गिरने से आलू की फसल पर संकट गहराता जा रहा है। वैसे भी मंडी में आलू पहले से ही मंदी का शिकार है। किसानों का कहना है कि उन्होंने बड़ी उम्मीदों के साथ आलू की खेती की थी, ताकि भविष्य में उनके सपने साकार हों और बच्चों का जीवन खुशहाल बन सके, लेकिन मौजूदा हालात ने उन्हें गहरी चिंता में डाल दिया है।
बुजुर्गों और बच्चों पर बढ़ा खतरा
भीषण सर्दी का असर बुजुर्गों और बच्चों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। बुजुर्ग घरों में दुबके रहने को मजबूर हैं, क्योंकि इस उम्र में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है और शीतलहर जानलेवा साबित हो सकती है। बच्चों में भी सर्दी-जुकाम और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। लोगों के अनुसार ढाई घाट शमशाबाद स्थित गंगा नदी पर अंतिम संस्कार कार्यक्रमों में अचानक वृद्धि देखी जा रही है। बाहर से आने वाले लोगों का कहना है कि सर्द मौसम का दुष्प्रभाव बुजुर्गों के लिए काल बनता जा रहा है। यदि समय रहते एहतियात न बरती जाए तो हालात और भी खतरनाक हो सकते हैं। गांवों से लेकर चौराहों-तिराहों तक सन्नाटा पसरा हुआ है। लोग बेहद जरूरी होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं। अफसोस की बात यह है कि प्रशासनिक स्तर पर जलाए जाने वाले अलाव कहीं नजर नहीं आ रहे।
भाकिमयू अराजनैतिक गुट ने उठाई आवाज
भीषण सर्दी से जूझ रहे गरीब मजदूरों और किसानों की समस्याओं को देखते हुए भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक गुट) के प्रदेश अध्यक्ष राम बहादुर राजपूत ने जिला प्रशासन से शमशाबाद क्षेत्र के सार्वजनिक स्थानों, चौराहों और तिराहों पर अलाव जलवाए जाने की मांग की है। प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि उन्हें भी जानकारी मिली है कि अधिकांश चौराहों पर अलाव नहीं जलाए गए हैं और जहां कहीं अलाव जलाए भी गए हैं, वहां महज खानापूर्ति की गई है। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि भीषण सर्दी और शीतलहर के जहर को देखते हुए तुरंत प्रभाव से सार्वजनिक स्थानों पर पर्याप्त अलाव जलवाए जाएं, ताकि गरीब मजदूर, किसान, बुजुर्ग और राहगीर कुछ राहत पा सकें।


