शमशाबाद (फर्रुखाबाद): ढाई घाट शमशाबाद (Dhai Ghat Shamshabad) स्थित पवित्र गंगा नदी (Ganges) के तट पर इन दिनों गंदगी का अंबार लगा हुआ है। धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र होने के बावजूद साफ-सफाई की बदहाल स्थिति ने स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में गहरी नाराजगी पैदा कर दी है। हैरानी की बात यह है कि खबरों और शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार जनप्रतिनिधि और अधिकारी अब तक बेखबर बने हुए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सदियों से पवित्रता का प्रतीक मानी जाने वाली गंगा मैया के इस तट पर हर वर्ष बड़े धार्मिक आयोजन होते हैं। प्रशासनिक स्तर पर मेलों का आयोजन भी किया जाता है, जिनमें जनपद ही नहीं बल्कि अंतर्जनपदीय और अंतरराज्यीय क्षेत्रों से श्रद्धालु, कल्पवासी, साधु-संत और व्यापारी बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। गंगा तट पर आराधना, स्नान और सुख-समृद्धि की कामनाओं के साथ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होते हैं।
हाल ही में ढाई घाट शमशाबाद पर रामनगरिया मेले का आयोजन हुआ, जो पूरे एक माह तक चला। इस दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं और कल्पवासियों ने यहां प्रवास किया। मेला समाप्त होने के बाद सभी अपने-अपने गंतव्यों को लौट गए, लेकिन पीछे छोड़ गए गंदगी के ढेर—पॉलीथिन, पूजा सामग्री, कचरा और अन्य अपशिष्ट—जो आज भी गंगा के दोनों तटों पर बिखरे पड़े हैं।
स्थिति यह है कि यहां रोज़ सैकड़ों लोग अंतिम संस्कार और गंगा स्नान के लिए पहुंचते हैं, लेकिन चारों ओर फैली गंदगी से श्रद्धालुओं का ध्यान भटक रहा है और आस्था को ठेस पहुंच रही है। आने-जाने वाले लोग इस अव्यवस्था के लिए समाजसेवियों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को कोसते नजर आते हैं।
लोगों का कहना है कि मेला समापन के तुरंत बाद व्यापक सफाई अभियान चलाया जाना चाहिए था, ताकि गंगा मैया की पवित्रता बनी रहती। सरकार जहां एक ओर स्वच्छता अभियान को बढ़ावा दे रही है, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार अधिकारी अपने दायित्वों से बचते दिखाई दे रहे हैं, जो सरकारी आदेशों की खुलेआम अनदेखी है।


