नेपाल की राजधानी काठमांडू में पिछले वर्ष सितंबर में हुए जेन-जी आंदोलन और उससे जुड़ी हिंसा की जांच करने वाले उच्च स्तरीय आयोग ने अपनी रिपोर्ट अंतरिम सरकार को सौंप दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि उस समय की सरकार की कमजोर प्रशासनिक व्यवस्था और खराब शासन ही हिंसक घटनाओं की मुख्य वजह बनी।
जांच आयोग के अध्यक्ष और नेपाल के पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज Gauri Bahadur Karki ने रविवार को यह रिपोर्ट अंतरिम प्रधानमंत्री Sushila Karki को सौंपी। यह रिपोर्ट काठमांडू स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय सिंहदरबार में औपचारिक रूप से सरकार को दी गई।
आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि उस समय की सरकार स्थिति को संभालने में पूरी तरह असफल रही। प्रशासनिक स्तर पर समन्वय की कमी और निर्णय लेने में देरी के कारण विरोध प्रदर्शन हिंसक रूप ले गया।
हालांकि रिपोर्ट सौंपते समय आयोग और सरकार दोनों ने यह स्पष्ट नहीं किया कि प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने का आदेश किसने दिया था। इस वजह से अभी भी कई सवाल अनुत्तरित बने हुए हैं और लोगों में जवाबदेही की मांग बढ़ रही है।
सितंबर 2025 में हुए जेन-जी आंदोलन के दौरान दो दिनों में भारी हिंसा हुई थी। इस हिंसा में कुल 76 लोगों की मौत हो गई थी, जिससे देशभर में राजनीतिक हलचल मच गई थी।
पहले दिन यानी 8 सितंबर को हुए प्रदर्शन के दौरान 22 युवाओं की मौत हुई थी। इसके बाद अगले ही दिन हालात और बिगड़ गए और हिंसा में 54 और लोगों की जान चली गई।
जेन-जी आंदोलन को नेपाल के युवाओं की ओर से पारंपरिक राजनीति के खिलाफ एक बड़े विरोध के रूप में देखा गया था। बड़ी संख्या में युवाओं ने भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और राजनीतिक अस्थिरता के खिलाफ सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया था।
रिपोर्ट के अनुसार सरकार समय रहते संवाद और प्रभावी नियंत्रण की रणनीति नहीं बना सकी। इससे प्रदर्शन तेजी से उग्र होते गए और अंततः स्थिति हिंसक टकराव में बदल गई।
इन घटनाओं के बाद नेपाल की राजनीति में भारी उथल-पुथल देखने को मिली थी। कई राजनीतिक दलों पर जनता का दबाव बढ़ा और सरकार की कार्यशैली को लेकर व्यापक आलोचना हुई।
जांच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में प्रशासनिक सुधार, बेहतर सुरक्षा समन्वय और संकट प्रबंधन की नई नीतियों की सिफारिश भी की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार इस रिपोर्ट पर क्या कार्रवाई करती है और क्या जेन-जी आंदोलन के दौरान हुई मौतों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई ठोस कदम उठाया जाता है या नहीं।


