प्रयागराज: वृंदावन (Vrindavan) स्थित विख्यात संत ब्रह्मलीन प्रज्ञाचक्षु स्वामी शरणानंद के आश्रम मानव सेवा संघ पर फर्जी वसीयत के जरिए अवैध कब्जे के आरोपों से जुड़े मामले में उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना के खिलाफ लगाए गए आरोपों को लेकर सोमवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट (High Court), प्रयागराज में सुनवाई हुई। यह सुनवाई सनातन धर्म रक्षापीठ वृंदावन द्वारा दाखिल याचिका पर हुई।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि आश्रम पर अवैध कब्जे से जुड़े मामलों की जांच को प्रभावित करने और आरोपियों को बचाने के लिए वित्त मंत्री ने अपने पद का दुरुपयोग किया। याचिका के अनुसार फर्जी वसीयत के आधार पर भूमाफियाओं द्वारा आश्रम पर कब्जा किया गया और इस पूरे मामले में भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत रही।
विदित हो कि इससे पहले सनातन धर्म रक्षापीठ वृंदावन के पीठाधीश्वर कथावाचक कौशल किशोर ठाकुर ने मथुरा की एमपी-एमएलए कोर्ट में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना के खिलाफ याचिका दायर की थी। उस याचिका में वादी की ओर से आरोप लगाया गया था कि मंत्री के प्रभाव में वादी को धमकाया गया और न्यायालय परिसर में जान से मारने का प्रयास भी किया गया। वादी का कहना था कि दबाव के चलते क्षेत्राधिकार का हवाला देकर याचिका खारिज कर दी गई, जिससे उन्हें न्याय नहीं मिल सका।
इसके बाद वादी ने न्याय की मांग को लेकर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट में दायर रिवीजन याचिका के माध्यम से मथुरा एमपी-एमएलए कोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है। वादी की ओर से पूर्व अध्यक्ष वार एसोसिएशन ठाकुर किशन सिंह एवं सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता रीना एन. सिंह ने साक्ष्यों के आधार पर एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है।
सोमवार को हाईकोर्ट की 53 नंबर अदालत में मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान प्रतिवादी राज्य सरकार, वित्त मंत्री सुरेश खन्ना एवं निर्विकार सिंघल की ओर से अधिवक्ताओं ने वादी के विलंब आवेदन पर अपना जवाब प्रस्तुत किया। राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता न्यायालय में उपस्थित रहे।
वादी का आरोप है कि वित्त मंत्री ने अपने पद और प्रभाव का इस्तेमाल कर महान संत के आश्रम पर अवैध कब्जा करने वाले भूमाफियाओं और भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण दिया तथा जांच को प्रभावित किया। साथ ही उनके समर्थकों द्वारा वादी को धमकाने के आरोप भी लगाए गए हैं। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले की अगली सुनवाई की तारीख 23 फरवरी निर्धारित की है। फिलहाल मामला विचाराधीन है।


