18 साल से जमे छात्रावास अधीक्षक पर सभी नियम फेल
फर्रुखाबाद। समाज कल्याण विभाग में तैनात संतोष कुमार को लेकर लेकर इन दिनों चर्चा आम है , जिसने विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। संतोष कुमार का मूल पद राजकीय अनुसूचित छात्रावास, कमालगंज में अधीक्षक का है, लेकिन प्रभाव और सेटिंग के चलते वह कई वर्षों से महत्वपूर्ण पटल संभाल रहा है।
सूत्रों के अनुसार, जिला समाज कल्याण अधिकारी रेनू यादव की नजदीकी के चलते संतोष कुमार को बाबुओं से पटल हटाकर छात्रवृत्ति, हरिजन उत्पीड़न, मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना और लेखाकार जैसे अहम कार्य सौंप दिए गए हैं। आरोप है कि इन महत्वपूर्ण पटल के माध्यम से वह कार्यालय में बैठकर कथित तौर पर धनउगाही करता है, जबकि छात्रावास की जिम्मेदारी पूरी तरह नजरअंदाज कर दी गई है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि संतोष कुमार पिछले करीब 18 वर्षों से जनपद में ही जमे हुए हैं। कई बार तबादले के आदेश भी हुए, लेकिन हर बार कथित रूप से पैसे और प्रभाव के बल पर उन्हें रुकवा लिया गया। विभागीय सूत्रों का कहना है कि वह खुलेआम यह दावा करता है कि उसकी निदेशालय स्तर तक ‘सेटिंग’ है और वह नियमित रूप से पैसे पहुंचाता है, इसलिए कोई उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
इसके अलावा ठेकेदारों से भी उसकी करीबी संबंधों की चर्चा है, जिससे विभागीय कार्यों में पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। कमालगंज में अधीक्षक पद पर तैनाती के बावजूद छात्रावास में उसकी अनुपस्थिति को लेकर भी स्थानीय स्तर पर नाराजगी बनी हुई है।
इस पूरे मामले ने समाज कल्याण विभाग की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिए हैं। यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो बड़े स्तर पर अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है।


