मैनपुरी। बुढ़ापे में सहारा बनने वाली वृद्धावस्था पेंशन योजना जिले के कई बुजुर्गों के लिए परेशानी का सबब बनती जा रही है। आवेदन प्रक्रिया और बैंकिंग संबंधी जटिलताओं से अनजान बुजुर्ग पेंशन शुरू कराने के लिए ब्लॉक, बैंक शाखा और विकास भवन के चक्कर काटने को मजबूर हैं। बावजूद इसके उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। कई बुजुर्गों का कहना है कि विभागीय दफ्तरों की दौड़ लगाते-लगाते अब उनकी पेंशन मिलने की उम्मीद भी दम तोड़ने लगी है।
सरकार की मंशा है कि बुजुर्गों को बुढ़ापे में आर्थिक संबल मिले और उन्हें किसी के आगे हाथ न फैलाना पड़े। इसी उद्देश्य से वृद्धावस्था पेंशन योजना संचालित की जा रही है। जिले में लगभग 95 हजार लाभार्थियों को इस योजना का लाभ दिया जा रहा है। इसके लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से आवेदन की व्यवस्था है, लेकिन व्यवहारिक स्तर पर यह प्रक्रिया कई बुजुर्गों के लिए कठिन साबित हो रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकांश बुजुर्गों को न तो ऑनलाइन प्रक्रिया की जानकारी है और न ही बैंकिंग औपचारिकताओं की समझ। आधार लिंकिंग, बैंक खाते में त्रुटि, दस्तावेजों की कमी या पोर्टल पर आवेदन लंबित रहने जैसी समस्याओं के कारण उनका पेंशन भुगतान शुरू नहीं हो पा रहा है। शिकायतों के निस्तारण के लिए आईजीआरएस पोर्टल पर भी प्रार्थना पत्र दिए गए, लेकिन बुजुर्गों का आरोप है कि वहां से भी उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिली।
बुजुर्गों ने मांग की है कि पेंशन आवेदन की प्रक्रिया को सरल बनाया जाए। उनका कहना है कि ग्राम पंचायत सचिव या संबंधित कर्मचारी गांव स्तर पर ही घर-घर जाकर आवेदन की औपचारिकताएं पूरी कराएं, ताकि उन्हें बार-बार दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का भी कहना है कि वृद्धावस्था पेंशन जैसी संवेदनशील योजना में तकनीकी अड़चनों को कम कर मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है। यदि व्यवस्था को सरल और पारदर्शी बनाया जाए तो पात्र बुजुर्गों को समय पर पेंशन मिल सकेगी और उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन यापन में मदद मिले।


