33 C
Lucknow
Tuesday, April 7, 2026

‘इस्लामिक नाटो’ का सपना टूटा: पश्चिम एशिया में पाकिस्तान की रणनीति क्यों हुई नाकाम?

Must read

नई दिल्ली
पश्चिम एशिया में खुद को एक प्रभावशाली सुरक्षा शक्ति के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा पाकिस्तान अब कूटनीतिक झटकों का सामना कर रहा है। बहुप्रचारित ‘इस्लामिक नाटो’ बनाने की उसकी योजना मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों में कमजोर पड़ती दिख रही है।

सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान ने इस पहल के तहत कई मुस्लिम देशों को एक साझा सुरक्षा मंच पर लाने की कोशिश की थी। इसमें सऊदी अरब, तुर्किये, मिस्र और सोमालिया जैसे देशों को जोड़ने की योजना थी।

हालांकि, ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव ने पूरे समीकरण को बदल दिया। इस संकट ने पाकिस्तान की रणनीतिक योजनाओं को पीछे धकेल दिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की सबसे बड़ी कमजोरी उसकी अनिर्णय की स्थिति रही। वह संकट के समय स्पष्ट और ठोस रुख अपनाने में विफल रहा, जिससे उसकी विश्वसनीयता पर असर पड़ा।

इस बीच, पाकिस्तान ने खुद को मध्यस्थ के रूप में पेश करने की कोशिश भी की। सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने का प्रस्ताव रखा।

लेकिन ईरान ने इस पहल को ठुकरा दिया, जिससे पाकिस्तान की कूटनीतिक कोशिशों को बड़ा झटका लगा। इससे यह भी साफ हो गया कि क्षेत्रीय शक्तियां पाकिस्तान को भरोसेमंद मध्यस्थ नहीं मान रहीं।

इस असफलता के पीछे एक और बड़ा कारण पाकिस्तान और ईरान के बीच बढ़ता अविश्वास भी है। खासकर बलूचिस्तान में हुई सैन्य कार्रवाइयों के बाद दोनों देशों के रिश्ते तनावपूर्ण हो गए हैं।

देश के अंदरूनी हालात भी इस रणनीतिक विफलता में अहम भूमिका निभा रहे हैं। बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में पहले से ही सुरक्षा चुनौतियां बनी हुई हैं।

यहां बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान जैसे संगठनों के साथ लगातार संघर्ष जारी है, जिससे पाकिस्तान की आंतरिक स्थिरता प्रभावित हो रही है।

विश्लेषकों का कहना है कि इन परिस्थितियों में पाकिस्तान का बाहरी रणनीतिक विस्तार करना मुश्किल हो गया है। पहले आंतरिक सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता जरूरी है।

साथ ही, यह भी आरोप लग रहे हैं कि कई मामलों में सैन्य नेतृत्व और राजनीतिक नेतृत्व के बीच तालमेल की कमी है। इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।

क्षेत्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पाकिस्तान ने अपनी नीतियों में स्पष्टता और संतुलन नहीं लाया, तो उसकी वैश्विक भूमिका और कमजोर हो सकती है।

Must read

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article