फर्रूखाबाद में अब मुख्यमंत्री का जीरो टॉलरेंस ठेंगे पर =माफिया अनुपम और उसके भाई पहुंच चुके जेल, बाहर घूम रहे गैंग पर खुलेआम रहनुमाई
=माफिया का होटल गुरू शरणम तो गिरा दिया, उसी सरकारी जमीन पर बने भवनों को अपील के बहाने लगातार अभयदान
=सरकारी राजस्व कर्मी खुलेआम करा रहे माफिया के गुर्गो को बाबा साहब भीमराव की जमीन पर कब्जे
यूथ इंडिया संवाददाता
फर्रुखाबाद। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सपनों को साकार करते जिम्मेदारों ने पूर्व में कड़ी मेहनत और मशक्कत के साथ खुद की परवाह किए बगैर जनपद में जिस प्रकार जीरो टॉलरेंस योजना को अमलीजामा पहनाते हुए माफियाराज पर शिकंजा कसा था और जनपद की गोशालाओं में सेवा के चार चांद लगाकर रामराज्य जैसे सुन्दर माहौल की संकल्पना को साकार किया था।
वक्त बढ़ते-बढ़ते आज हालात बद से बदतर हो गये। माफिया पर करारा प्रहार करने के नाम पर डा० अनुपम दुबे और उसके दबंग भाईयों को तो सलाखों के पीछे भेज कागजी पेट भर दिया गया। लेकिन असल में गुण्डाराज बढ़ता गया अब तो पहले के बने मॉडल की आढ़ में जंगलराज जैसा माहौल है और जनता करहाने लगी है।
योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा लागू जीरो टॉलरेंस नीति के दावों के बीच जनपद फर्रूखाबाद की हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। यहां गोशालाओं की बदहाल स्थिति और सडक़ों पर खुलेआम घूमते आवारा गोवंश, बंदर और कुत्ते प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोल रहे है।
जनपद की कई गोशालाओं मे न तो पर्याप्त चारा उपलब्ध है और न ही साफ सफाई की समुचित व्यवस्था, कई स्थानों पर गोवंश भूख और बीमारी से जूझ रहे है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि गोशालाओं के संचालन के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति हो रही है। जबकि हकीकत में व्यवस्थाएं अब पूरी तरह चरमराई हुई है।
प्रदेश सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का उद्देश्य भ्रष्टाचार और लापरवाही पर सख्त कार्यवाही करना है, लेकिन यहां की स्थिति इस नीति को ठेंगा दिखाती नजर आ रही है। क्योंकि ठंडी सडक़ स्थित जिस सरकारी भूमि पर माफिया अनुपम दुबे का आलीशान होटल गुरू शरणम बना था उसी सरकारी जमीन पर केएम इंडिया और केएम हाउस होटल जैसी अन्य कई आलीशान बिल्डिंग बनी है। पूर्व के प्रशासन द्वारा इन अवैध भवनों को ध्वस्त करने के लिए हुए आदेश के क्रम में माफिया का तो होटल गिरा दिया गया था। लेकिन अन्य को उच्च न्यायालय इलाहाबाद शरण लेने के कारण तब छोड दिया गया था।
उच्च न्यायालय ने जिला प्रशासन को फिर से सुनवाई करने के निर्देश दिये और प्रशासन द्वारा सुनवाई की भी गई। उसके उपरांत ध्वस्तीकरण के आदेश बरकरार रहे। लेकिन आश्चर्य की बात यह रही कि माफिया के अन्य गुर्गो ने सेटिंग रसूख और कागज के कीमती टुकड़ों के बलबूते अपील का खिलौना बनाकर अपने ऊपर होने वाली कार्यवाही से निजात पा ली। होटल गुरू शरणम का ध्वस्तीकरण तो हुए दूसरी साल होने जा रही है। लेकिन अन्य निर्माण प्रशासन के खेल पर ठप्पा लगा रहे है।
इससे ज्यादा और चौंकाने वाली बात क्या होगी कि राजस्व विभाग के कर्मचारी ही बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर की जमीन को अपनी ही रिपोर्ट बदलकर माफिया के गुर्गो के हवाले कर रहे है। उनकी हठधर्मिता के आगे उच्च न्यायालय इलाहाबाद के आदेश भी फीके हैं। गौर फरमा दें तो राजस्व अभिलेखों में दर्ज सरकारी भूमि गाटा संख्या ३७४ रकवा १३००हे० स्थित बाग लकूला परगना पहाडा तहसील सदर जोकि अम्बेडकर पार्क और पुस्तकालय के नाम दर्ज है।
इस सरकारी भूमि को धोखाधडी से सरकारी अभिलेखों में हेरफेर कर राजस्व विभाग के ही कर्मचारियों ने अपने परिजनों के नाम दर्ज करा ली और लोक सेवक के नियमों की धज्जियां उड़ा दीं। जब टीम बनाकर जांच हुई तो पहले रिपोर्ट कुछ थी लेकिन बाद में मोटा नजराना पहुंचते ही मजिस्ट्रेटी रिपोर्ट ही बदल दी गई और माफिया के गुर्गो का कब्जा बरकरार कर दिया गया। फायदा राजस्व कर्मचारियों ने भी पूरा उठाया।
बता दें कि बीते कईवर्षो में जिले में तैनात रहे आलाधिकारियों ने कड़ी मशक्कत के बीच माफिया तंत्र की रीड़़ पर जो बार किया था उस चोट से हुए घावों को आज जिम्मेदार ही भरने में जुट गये है क्योंकि मामला जहां सजातीय आ जाता वहां कलम थमने लगती।


