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Tuesday, April 7, 2026

ड्रोन हमले में मारे गए भारतीय नाविक का शव मुंबई पहुंचा, परिजनों में शोक

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ओमान
पिछले महीने ओमान तट के पास हुए एक ड्रोन बोट हमले में जान गंवाने वाले भारतीय नाविक दीक्षित सोलंकी (25) का शव आखिरकार भारत पहुंच गया। यह दुखद घटना उस समय हुई थी जब क्षेत्र में ईरान से जुड़े तनाव के बीच समुद्री गतिविधियां प्रभावित हो रही थीं।

नेशनल यूनियन ऑफ सीफेयरर्स ऑफ इंडिया (एनयूएसआई) ने सोमवार को पुष्टि की कि सोलंकी का पार्थिव शरीर मुंबई लाया गया है। इस खबर के बाद परिवार और समुद्री समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई।

चार मार्च को ओमान के तट के पास एक तेल टैंकर पर विस्फोटकों से भरी ड्रोन बोट ने टक्कर मार दी थी। इस हमले में सोलंकी की मौके पर ही मौत हो गई थी। घटना ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

एनयूएसआई के एक सदस्य के अनुसार, रविवार को मुंबई हवाई अड्डे के कार्गो टर्मिनल पर सोलंकी के पिता अमृतलाल और बहन मिताली को शव सौंपा गया। इस दौरान परिवार के सदस्य बेहद भावुक नजर आए।

बताया गया है कि सोलंकी के शव को भारत लाने के लिए परिजनों को लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। उन्होंने इसके लिए न्यायालय का सहारा भी लिया।

परिवार ने तीन दिन पहले बंबई हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर शव को जल्द भारत लाने की मांग की थी। अदालत के हस्तक्षेप के बाद प्रक्रिया में तेजी आई।

दीक्षित सोलंकी एक युवा और मेहनती नाविक थे, जो अपने परिवार का सहारा बने हुए थे। उनकी असामयिक मृत्यु से परिवार पर गहरा आघात पड़ा है।

इस घटना ने समुद्री क्षेत्रों में काम करने वाले भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध जैसे हालात में समुद्री मार्गों पर जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।

सरकार और संबंधित एजेंसियों से उम्मीद की जा रही है कि वे भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएंगे। खासकर संवेदनशील इलाकों में काम कर रहे भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी हो गया है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस हमले की निंदा की गई है। ड्रोन और मानव रहित हमलों के बढ़ते इस्तेमाल ने समुद्री सुरक्षा के नए खतरे पैदा कर दिए हैं।

सोलंकी के अंतिम संस्कार की तैयारियां मुंबई में की जा रही हैं, जहां परिजन और करीबी उन्हें अंतिम विदाई देंगे।

यह घटना न केवल एक परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि यह उन हजारों भारतीय नाविकों के लिए भी चेतावनी है, जो रोज़ी-रोटी के लिए जोखिम भरे समुद्री क्षेत्रों में काम कर रहे हैं।

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