उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ,”योगी आदित्यनाथ”, ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि विकास का वास्तविक आधार गांव, गरीब, किसान और युवा ही होने चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक विकास की धारा समाज के अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंचेगी, तब तक समावेशी और टिकाऊ प्रगति संभव नहीं है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गांव भारत की आत्मा हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ किए बिना देश का समग्र विकास अधूरा रहेगा। गरीबों के जीवन स्तर में सुधार, किसानों की आय में वृद्धि और युवाओं को शिक्षा व रोज़गार के अवसर देना सरकार की प्राथमिकता है। इसी दृष्टि से योजनाओं का क्रियान्वयन जमीन पर प्रभावी ढंग से किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि किसानों को सशक्त बनाने के लिए सिंचाई, फसल बीमा, समर्थन मूल्य और आधुनिक कृषि तकनीकों पर निरंतर काम किया जा रहा है, ताकि खेती लाभ का माध्यम बने। वहीं गरीबों के लिए आवास, स्वास्थ्य, पेयजल और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं के माध्यम से जीवन की मूलभूत आवश्यकताओं को सुनिश्चित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने युवाओं को राष्ट्र की शक्ति बताते हुए कहा कि युवा यदि कौशलयुक्त, आत्मनिर्भर और अनुशासित होंगे, तो प्रदेश और देश स्वतः आगे बढ़ेगा। शिक्षा, प्रशिक्षण और स्वरोज़गार के अवसर बढ़ाकर युवाओं को सक्षम बनाया जा रहा है, ताकि वे केवल नौकरी तलाशने वाले नहीं, बल्कि रोज़गार सृजित करने वाले बनें।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल आंकड़ों में विकास दिखाना नहीं, बल्कि जनजीवन में वास्तविक परिवर्तन लाना है। गांवों की सड़कों, बिजली, जल, स्वास्थ्य और शिक्षा की सुविधाओं में सुधार कर विकास को जन-जन तक पहुंचाया जा रहा है।
निष्कर्षतः, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह वक्तव्य विकास की उस सोच को रेखांकित करता है, जिसमें गांव, गरीब, किसान और युवा केंद्र में हैं। यही दृष्टिकोण प्रदेश को सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा तय करता है।


