इस्लामाबाद। पाकिस्तान इस समय गंभीर आंतरिक अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। देश के सबसे बड़े और अशांत प्रांत बलूचिस्तान में अलगाववादी संगठन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने एक बार फिर बड़े पैमाने पर हमले कर सुरक्षा व्यवस्था को हिला कर रख दिया है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि खुद पाकिस्तानी नेतृत्व अब सेना की नाकामी को खुले मंच से स्वीकार करने लगा है।
बलूच विद्रोहियों ने हाल ही में बलूचिस्तान के कई कस्बों में एक साथ समन्वित हमले किए। इन हमलों में कम से कम 80 पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने की खबर है, जबकि 30 से अधिक सरकारी इमारतों और संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचाया गया। इन हमलों को हाल के वर्षों में सबसे घातक माना जा रहा है।
इन घटनाओं के बाद पाकिस्तानी सेना ने बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई शुरू की है, जिसे ‘ऑपरेशन हेरोफ फेज 2’ नाम दिया गया है। इस अभियान के तहत सेना और अर्धसैनिक बलों को बलूचिस्तान के कई इलाकों में तैनात किया गया है। पाकिस्तान का दावा है कि जवाबी कार्रवाई में सैकड़ों विद्रोहियों को मार गिराया गया है।
पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार, सेना की कार्रवाई में अब तक 177 बलूच विद्रोहियों को ढेर किया गया है। हालांकि बलूच राष्ट्रीय आंदोलन के नेता हकीम बलूच ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि इस्लामाबाद आंकड़ों के जरिए जमीनी हकीकत छिपाने की कोशिश कर रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच पाकिस्तान की बेबसी उस वक्त खुलकर सामने आ गई, जब रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने नेशनल असेंबली में सेना की असफलता स्वीकार की। उन्होंने माना कि सरकार और सेना बलूच विद्रोहियों पर काबू पाने में पूरी तरह नाकाम रही है।
ख्वाजा आसिफ ने अपने बयान में कहा कि बलूचिस्तान का भौगोलिक विस्तार पाकिस्तान के कुल क्षेत्रफल का 40 प्रतिशत से भी ज्यादा है। इतने विशाल और दुर्गम इलाके को नियंत्रित करना किसी घनी आबादी वाले शहर को संभालने से कहीं ज्यादा कठिन है। उन्होंने स्वीकार किया कि सीमित संसाधनों और जनशक्ति के कारण सेना के लिए हर इलाके में प्रभावी निगरानी संभव नहीं है।
रक्षा मंत्री ने यह भी कबूल किया कि बलूच लड़ाके सैन्य उपकरणों के मामले में पाकिस्तानी सेना से कहीं आगे हैं। उन्होंने बताया कि विद्रोहियों के पास अत्याधुनिक राइफल्स, नाइट विजन डिवाइसेज, हीट-डिटेक्टिंग लेजर और फुल कॉम्बैट गियर मौजूद हैं, जो कई मामलों में पाक सेना के पास भी नहीं हैं।
ख्वाजा आसिफ के अनुसार, विद्रोहियों के इस्तेमाल में आने वाले उपकरण बेहद महंगे हैं। उन्होंने बताया कि हीट-डिटेक्टिंग लेजर की कीमत 4 से 5 हजार डॉलर तक होती है, जबकि पूरा कॉम्बैट गियर करीब 20 हजार डॉलर का है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि बलूच लड़ाकों के पास अमेरिकी मूल के उन्नत हथियार मौजूद हैं।
लगातार बढ़ती हिंसा ने बलूचिस्तान में आम नागरिकों की जिंदगी को डर और अनिश्चितता से भर दिया है। लोग दशकों पुराने इस संघर्ष के और भड़कने से आशंकित हैं, जबकि मानवाधिकार संगठनों ने भी हालात पर चिंता जताई है।
कुल मिलाकर बलूचिस्तान संकट अब पाकिस्तान के लिए केवल सुरक्षा चुनौती नहीं, बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक विफलता का प्रतीक बनता जा रहा है। रक्षा मंत्री का यह खुला कबूलनामा न सिर्फ सेना की कमजोरियों को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि बलूचिस्तान में शांति बहाल करना पाकिस्तान के लिए अब पहले से कहीं ज्यादा कठिन हो चुका है।


