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Monday, February 16, 2026

दरोगा पर कार चोरी का आरोप निकला फर्जी, जांच में साक्ष्य न मिलने पर मामला रद्द करने की तैयारी

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बकेवर/ इटावा : थाना क्षेत्र में एक महिला द्वारा कन्नौज में तैनात उपनिरीक्षक पर कार चोरी का आरोप लगाए जाने का मामला पुलिस जांच में फर्जी पाया गया है। विस्तृत विवेचना के दौरान न तो कथित चोरी की घटना के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य मिला और न ही वाहन के स्वामित्व को लेकर लगाए गए दावे सही पाए गए। पुलिस अब इस मुकदमे को एक्सपंज (रद्द) करने की प्रक्रिया में जुट गई है।

महेवा निवासी तथा किसान संगठन से जुड़ी सरिता यादव ने बकेवर थाने में तहरीर देकर ठठिया थाना, जनपद कन्नौज में तैनात उपनिरीक्षक राकेश कुमार पटेल पर उनकी कार चोरी करने का आरोप लगाया था। उल्लेखनीय है कि उपनिरीक्षक राकेश कुमार पटेल वर्ष 2018 में बकेवर थाने की महेवा चौकी के इंचार्ज भी रह चुके हैं। आरोप दर्ज होने के बाद मामला चर्चा में आ गया था और पुलिस ने इसकी गंभीरता से जांच शुरू की।

मामले की विवेचना कर रहे वराउख चौकी इंचार्ज दयाशंकर वर्मा ने बताया कि पुलिस ने कथित घटना स्थल और आसपास के क्षेत्रों की गहन जांच की। संभावित स्थानों के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई, स्थानीय लोगों से पूछताछ की गई और वाहन संबंधी अभिलेखों की जांच की गई, लेकिन आरोपों की पुष्टि करने वाला कोई साक्ष्य सामने नहीं आया। न तो कोई प्रत्यक्षदर्शी मिला और न ही महिला द्वारा प्रस्तुत किए गए तथ्यों की पुष्टि हो सकी।

रविवार को पुलिस अधीक्षक ग्रामीण श्रीशचंद्र तथा क्षेत्राधिकारी भरथना रामदवन मौर्य ने बकेवर थाने पहुंचकर पूरे प्रकरण की समीक्षा की। अधिकारियों ने विवेचना अधिकारी से बिंदुवार जानकारी ली और उपलब्ध दस्तावेजों का परीक्षण किया। जांच के दौरान यह भी स्पष्ट हुआ कि जिस कार को चोरी बताया गया है, उसका पंजीकरण सुरेंद्र यादव के नाम पर है। संबंधित अभिलेखों में सरिता यादव का नाम न तो स्वामी के रूप में दर्ज है और न ही वह नामिनी के रूप में सूचीबद्ध हैं।

पुलिस अधीक्षक ग्रामीण श्रीशचंद्र ने बताया कि महिला द्वारा घटना के समर्थन में कोई सीसीटीवी फुटेज या अन्य ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराए गए। वाहन स्वामित्व संबंधी तथ्य भी आरोपों से मेल नहीं खाते। इन परिस्थितियों में प्रथम दृष्टया मामला असत्य पाया गया है। विधिक प्रक्रिया के तहत अब मुकदमे को एक्सपंज करने की कार्रवाई की जा रही है।

पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी भी व्यक्ति पर लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच करना पुलिस की जिम्मेदारी है। यदि जांच में आरोप निराधार पाए जाते हैं तो कानून के अनुसार आवश्यक कदम उठाए जाते हैं। इस प्रकरण में भी तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जा रही है।

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