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Tuesday, March 10, 2026

तेल संकट के बीच थाईलैंड ने सरकारी कर्मचारियों को दिया ‘वर्क फ्रॉम होम’ का आदेश

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मध्य पूर्व में जारी तनाव और वैश्विक स्तर पर बढ़ती तेल कीमतों के बीच कई देश ईंधन बचाने के लिए सख्त कदम उठा रहे हैं। पाकिस्तान के बाद अब थाईलैंड ने भी ईंधन की खपत कम करने के उद्देश्य से सरकारी कर्मचारियों को घर से काम करने का आदेश दिया है। थाईलैंड के प्रधानमंत्री अनुटिन चार्नवीराकुल ने मंगलवार को इस फैसले की घोषणा की।

सरकार का कहना है कि यह कदम मुख्य रूप से ईंधन की खपत को कम करने और बढ़ती तेल कीमतों के प्रभाव को नियंत्रित करने के लिए उठाया गया है। सरकारी कर्मचारियों को निर्देश दिया गया है कि जहां संभव हो वहां से ‘वर्क फ्रॉम होम’ अपनाया जाए, ताकि आवागमन कम हो और ईंधन की बचत की जा सके।

इसके साथ ही थाई सरकार ने कई अन्य निर्देश भी जारी किए हैं। सरकारी कर्मचारियों के विदेश दौरे पर अस्थायी रोक लगा दी गई है और सरकारी कार्यालयों में ऊर्जा बचाने के लिए लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। सरकार का मानना है कि इन उपायों से ऊर्जा की खपत को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

दरअसल, मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। कई देशों को आशंका है कि अगर स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो ईंधन की आपूर्ति और कीमतों पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसी वजह से कई सरकारें पहले से ही बचत और मितव्ययिता के कदम उठा रही हैं।

इससे पहले पाकिस्तान ने भी बढ़ती तेल कीमतों को देखते हुए कई कड़े फैसले किए थे। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सरकारी खर्चों में कटौती और ईंधन बचाने के लिए कई घोषणाएं की थीं। इन कदमों का उद्देश्य आर्थिक दबाव को कम करना और ऊर्जा संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करना है।

पाकिस्तान में मंत्रियों और सांसदों के वेतन में कटौती की घोषणा की गई है। मंत्रियों को दो महीने तक वेतन नहीं मिलेगा, जबकि सांसदों की सैलरी में 25 प्रतिशत की कटौती की गई है। इसके अलावा सरकारी विभागों को अपने खर्च में 20 प्रतिशत तक कमी करने का निर्देश दिया गया है।

ईंधन बचाने के लिए सरकारी वाहनों के इस्तेमाल पर भी सख्ती की गई है। पाकिस्तान में दो महीने तक सरकारी गाड़ियों को 50 प्रतिशत कम ईंधन मिलेगा और लगभग 60 प्रतिशत सरकारी वाहन सड़कों पर नहीं चलेंगे। इससे ईंधन की खपत में काफी कमी आने की उम्मीद जताई जा रही है।

इसके अलावा पाकिस्तान में सरकारी दफ्तरों को सप्ताह में चार दिन खोलने का फैसला किया गया है। आधे कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति दी गई है। हालांकि बैंक, अस्पताल, कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों जैसी आवश्यक सेवाओं को इस नियम से बाहर रखा गया है।

डॉन अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान सरकार ने ऊर्जा संकट से निपटने के लिए सख्त मितव्ययिता उपायों की घोषणा की है। इसके तहत सप्ताह के अंत से स्कूलों को दो सप्ताह के लिए बंद रखने का भी फैसला किया गया है।

दूसरी ओर, वियतनाम ने भी अपने नागरिकों से ईंधन बचाने की अपील की है। सरकार ने लोगों को घर से काम करने और निजी वाहनों के कम इस्तेमाल की सलाह दी है, ताकि ऊर्जा संसाधनों पर दबाव कम किया जा सके।

वहीं बांग्लादेश ने बिजली और ईंधन की खपत कम करने के लिए विश्वविद्यालयों को पहले ही बंद करने का फैसला किया था। साथ ही ईद-उल-फितर की छुट्टियों को भी आगे बढ़ा दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तेल संकट और गहराता है तो आने वाले समय में और भी देशों को ऐसे कड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं।

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