ग्रामीणों में दहशत, प्रशासन से ठोस कार्रवाई की मांग
शमशाबाद, फर्रुखाबाद: शमशाबाद क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में खूंखार बंदरों (ferocious monkeys) का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। खेतों से लेकर गांव की गलियों और घरों तक बंदरों के झुंड लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। ताजा मामला विकासखंड शमशाबाद क्षेत्र के ग्राम रजला मई का है, जहां हैंडपंप से पानी भरने जा रही एक महिला पर बंदरों के झुंड ने हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई।
जानकारी के अनुसार ग्राम रजला मई निवासी मुन्नी देवी पत्नी जितेंद्र कुमार शुक्रवार को घर के पास लगे सरकारी हैंडपंप से पानी भरने जा रही थीं। इसी दौरान अचानक खूंखार बंदरों का एक दल वहां पहुंच गया। बंदरों को देखकर महिला घबरा गई और इसी बीच बंदरों ने आक्रामक होकर उस पर हमला कर दिया। महिला के शोर मचाने पर आसपास के ग्रामीण लाठी-डंडे लेकर मौके पर पहुंचे और बमुश्किल बंदरों को भगाया।
हमले में महिला गंभीर रूप से घायल हो गई, जिसे परिजन तत्काल कस्बे के एक प्राइवेट नर्सिंग होम में भर्ती कराकर उपचार शुरू कराया। घटना के बाद से गांव में दहशत का माहौल है और लोग घरों से निकलने में भी डर महसूस कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस तरह क्षेत्र में आवारा गोवंशों की समस्या बनी हुई है, उसी तरह खूंखार बंदरों की आमद भी लगातार बढ़ती जा रही है। ये बंदर हर मौसम में गांव, बाग-बगीचों और खेत-खलिहानों में देखे जाते हैं। किसानों की तैयार फसलों को नुकसान पहुंचाकर उन्हें हजारों रुपये का घाटा झेलने पर मजबूर कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि अब तक कई महिला-पुरुष बंदरों के हमले में घायल हो चुके हैं। अक्सर महिलाएं जब छतों पर कपड़े सुखाने जाती हैं तो बंदर हमला कर देते हैं। घबराहट में कुछ लोग छत से गिरकर घायल हो जाते हैं तो कुछ बंदरों के काटने से जख्मी हो जाते हैं। यही नहीं, घरों में खाना बनाते समय बंदर कीमती सामान और कपड़े उठाकर ले जाते हैं, जिन्हें भगाने में ग्रामीणों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है।
ग्रामीणों ने बताया कि इसी गांव की किरण तथा सोबरन सिंह पर भी पूर्व में बंदरों ने हमला किया था, जिन्हें ग्रामीणों ने किसी तरह बचाया। वहीं सुशील कुमार की पत्नी सोहनलाल गंगवार को भी बंदरों ने काटकर गंभीर रूप से घायल कर दिया था, जिन्हें सीएचसी शमशाबाद में भर्ती कराया गया था। जानकारों के अनुसार पिछले 15 दिनों में आधा दर्जन से अधिक महिला और पुरुष बंदरों के हमले का शिकार हो चुके हैं।
ग्रामीणों में आक्रोश है और उनका कहना है कि न जाने कितने लोग इन खूंखार बंदरों के हमले में जान गंवा चुके हैं। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि बंदरों के आतंक से निजात दिलाने के लिए ठोस और स्थायी कार्रवाई की जाए, ताकि ग्रामीणों को इस जानलेवा समस्या से राहत मिल सके।


