ईरान के साथ लगातार बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य मौजूदगी और मजबूत कर दी है। अमेरिकी नौसेना का शक्तिशाली विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन तीन अन्य युद्धपोतों के साथ मध्य पूर्व पहुंच चुका है। इस घटनाक्रम के बाद एक बार फिर आशंका जताई जा रही है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (donald trump) ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का आदेश दे सकते हैं।
बताया जा रहा है कि ईरान में प्रदर्शनकारियों पर की गई सख्त कार्रवाई को लेकर अमेरिका पहले से ही नाराज है। ऐसे में अमेरिकी युद्धपोतों की तैनाती को दबाव की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। दूसरी ओर, ईरान ने भी साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उस पर कोई हमला किया गया, तो वह उसका करारा जवाब देगा।
तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने संकेत दिया कि तमाम आक्रामक बयानों और सैन्य तैयारियों के बावजूद ईरान अभी भी बातचीत के रास्ते को पूरी तरह बंद नहीं करना चाहता। ट्रंप के इस बयान ने हालात को और ज्यादा जटिल बना दिया है।
ट्रंप ने एक्सियोस न्यूज वेबसाइट से बातचीत में कहा कि “ईरान के पास हमारा एक विशाल नौसैनिक बेड़ा मौजूद है, जो वेनेजुएला से भी बड़ा है। वे समझौता करना चाहते हैं, मुझे यह पता है।” उन्होंने दावा किया कि ईरानी पक्ष ने कई बार संपर्क करने की कोशिश की है और वह बातचीत को इच्छुक है।
हालांकि, ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि अमेरिका आगे कौन सा रास्ता अपनाएगा। उन्होंने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम द्वारा सुझाए गए विकल्पों पर चर्चा करने से इनकार कर दिया और यह भी नहीं बताया कि वे सैन्य कार्रवाई या कूटनीति में से किसे प्राथमिकता दे रहे हैं।
अमेरिकी रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इन विकल्पों में ईरानी सैन्य ठिकानों पर सीधा हमला या फिर ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व को निशाना बनाना शामिल हो सकता है। इसका उद्देश्य 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से सत्ता में रही व्यवस्था को पूरी तरह कमजोर या समाप्त करना हो सकता है।
इसी बीच न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट ने हालात को और गंभीर बना दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप को अमेरिकी खुफिया एजेंसियों से ऐसी जानकारियां मिली हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि ईरानी सरकार की स्थिति अंदरूनी तौर पर कमजोर होती जा रही है और शाह के पतन के बाद से यह अपनी सबसे नाजुक अवस्था में है।
अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने भी इस ओर इशारा किया है कि अमेरिका का असली लक्ष्य ईरान में मौजूदा शासन को खत्म करना है। उन्होंने कहा कि भले ही अभी हिंसा कुछ समय के लिए रुक जाए, लेकिन अगर यही नेतृत्व सत्ता में बना रहा, तो भविष्य में हालात और भी खतरनाक हो सकते हैं।
वहीं ईरान भी पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहा है। हाल के दिनों में भले ही तेहरान ने बयानबाजी में संयम दिखाया हो, लेकिन उसकी सैन्य चेतावनियां साफ इशारा कर रही हैं कि वह किसी भी हमले के लिए तैयार है। ईरानी मीडिया के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच अनौपचारिक संवाद के चैनल खुले हुए हैं, हालांकि दोनों देशों के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं।
मंगलवार को ईरान के अखबार ‘हमशहरी’ ने रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के प्रवक्ता मोहम्मद अली नैनी के हवाले से कहा कि अगर अमेरिकी विमानवाहक पोत गलती से भी ईरानी क्षेत्रीय जल में प्रवेश करता है, तो उसे निशाना बनाया जाएगा। इस चेतावनी के साथ ही साफ हो गया है कि मध्य पूर्व एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव की ओर बढ़ता नजर आ रहा है।


