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Thursday, April 2, 2026

टीईटी अनिवार्यता के विरोध में दिल्ली में शिक्षकों का महासंग्राम: 4 अप्रैल को रामलीला मैदान में जुटेंगे लाखों शिक्षक

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लखनऊ

शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को सभी शिक्षकों के लिए अनिवार्य किए जाने के मुद्दे पर देशभर में असंतोष गहराता जा रहा है। इसी कड़ी में 4 अप्रैल को राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में एक विशाल शिक्षक रैली का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों से लाखों शिक्षकों के शामिल होने की संभावना है। यह रैली टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (TFI) के बैनर तले आयोजित की जा रही है, जिसका उद्देश्य टीईटी को लेकर बने नियमों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करना है।
बताया जा रहा है कि इस रैली में केवल उत्तर प्रदेश से ही एक लाख से अधिक शिक्षक भाग लेने के लिए दिल्ली पहुंचेंगे। शिक्षक संगठनों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद टीईटी को अनिवार्य बनाए जाने से उन शिक्षकों पर अनुचित दबाव डाला जा रहा है, जिनकी नियुक्ति पहले ही हो चुकी है। खासतौर पर वर्ष 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए यह नियम लागू करना पूरी तरह अन्यायपूर्ण बताया जा रहा है।
शिक्षकों का तर्क है कि जब उनकी नियुक्ति के समय टीईटी की कोई बाध्यता नहीं थी, तो अब अचानक इस शर्त को लागू करना उनके अधिकारों का उल्लंघन है। उत्तर प्रदेश में 27 जुलाई 2011 से टीईटी व्यवस्था लागू हुई थी, ऐसे में उससे पहले कार्यरत शिक्षकों को इस दायरे में लाना न केवल नियमों के विरुद्ध है, बल्कि उनके भविष्य को भी अनिश्चित बना रहा है।
रैली के माध्यम से शिक्षक सरकार से मांग कर रहे हैं कि इस मामले में संसद या विधानसभा के जरिए स्पष्ट कानून बनाया जाए, जिससे पहले से कार्यरत शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से राहत मिल सके। साथ ही वे सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को पुनर्विचार के लिए सरकार द्वारा प्रभावी पहल करने की मांग भी उठा रहे हैं।
इस प्रस्तावित रैली को लेकर शिक्षकों में जबरदस्त उत्साह और एकजुटता देखने को मिल रही है। विभिन्न शिक्षक संगठनों द्वारा अपने-अपने स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं और बड़ी संख्या में शिक्षकों को दिल्ली पहुंचाने की योजना बनाई गई है। माना जा रहा है कि यह प्रदर्शन देश में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सबसे बड़े आंदोलनों में से एक साबित हो सकता है।
यदि सरकार और शिक्षक संगठनों के बीच कोई समाधान नहीं निकलता है, तो यह आंदोलन आने वाले समय में और भी व्यापक रूप ले सकता है, जिसका असर शिक्षा व्यवस्था और सरकारी नीतियों पर भी पड़ना तय माना जा रहा है।

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