फर्रुखाबाद। ईरान और इजराइल के बीच चल रहे भू-राजनीतिक तनाव का असर अब बाजारों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने के कारण सूखे मेवों की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। खासकर पवित्र माह रमजान के दौरान खजूर और काजू की मांग अधिक होने के कारण इनके दामों में उल्लेखनीय उछाल देखने को मिल रहा है, जिससे आम उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
स्थानीय बाजारों में व्यापारियों के अनुसार कुछ ही दिनों में काजू की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है। पहले जो काजू लगभग 800 रुपये प्रति किलोग्राम तक बिक रहा था, वह अब बढ़कर करीब 1000 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है। इसी तरह छुहारे की कीमत भी 600 रुपये से बढ़कर लगभग 650 रुपये प्रति किलोग्राम तक हो गई है। व्यापारियों का कहना है कि युद्ध जैसे हालात के कारण माल ढुलाई और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग में दिक्कतें आ रही हैं, जिससे आयातित सूखे मेवों की लागत बढ़ गई है।
दरअसल खजूर, काजू और अन्य सूखे मेवे मुख्य रूप से खाड़ी देशों से भारत में आयात किए जाते हैं। मौजूदा तनाव के चलते इन देशों से आने वाली आपूर्ति प्रभावित हो रही है, जिसका सीधा असर भारतीय बाजारों पर पड़ रहा है। रमजान के महीने में रोजेदार इफ्तार के समय खजूर का सेवन विशेष रूप से करते हैं, इसलिए इस समय इसकी मांग सबसे अधिक रहती है।
व्यापारियों का अनुमान है कि यदि ईरान–इजराइल संघर्ष की स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो आने वाले 10 से 15 दिनों में मौजूदा स्टॉक खत्म होने के बाद कीमतों में और अधिक वृद्धि हो सकती है। ऐसे में उपभोक्ताओं को सूखे मेवों के लिए और ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है। वहीं ग्राहक भी बढ़ती कीमतों को लेकर चिंता जता रहे हैं और बाजार में खरीदारी करते समय पहले से अधिक सावधानी बरत रहे हैं।
तनाव का असर: रमजान में सूखे मेवों की कीमतों में उछाल, खजूर और काजू महंगे


