लखनऊl राज्यकर विभाग की वर्ष 2024-25 की कर संग्रह रिपोर्ट ने साफ किया है कि इस वित्त वर्ष में राजस्व की स्थिति पूरी तरह उतार-चढ़ाव भरी रही। विभाग द्वारा शामिल किए गए 59 व्यावसायिक क्षेत्रों में से 34 में गिरावट और 25 में बढ़ोतरी दर्ज की गई। सबसे अधिक दबाव तंबाकू से जुड़े उत्पादों पर देखने को मिला, जबकि वाहनों, उपभोक्ता वस्तुओं, इलेक्ट्रॉनिक सामान और रत्न–आभूषण जैसे सेक्टरों की मजबूत वृद्धि ने कुल राजस्व को संतुलन में बनाए रखा।

रिपोर्ट के अनुसार पान मसाला, खैनी और चबाने वाले तंबाकू से प्राप्त कर में उल्लेखनीय कमी आई है। वर्ष 2023-24 में इस श्रेणी से 601.53 करोड़ रुपये का राजस्व मिला था, जो 2024-25 में घटकर 541.51 करोड़ रुपये पर आ गया। इस तरह लगभग 10 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। विभाग के अधिकारियों ने इसकी मुख्य वजह पिछले वर्ष तंबाकू और पान मसाला कारोबार पर की गई कड़ी कार्रवाई और निगरानी को बताया है।

दिलचस्प रूप से तंबाकू की ही श्रेणी में आने वाले सिगरेट ने विपरीत रुझान दिखाते हुए मजबूत वृद्धि दर्ज की। 2023-24 में सिगरेट से 435.34 करोड़ रुपये का कर मिला था, जो 2024-25 में बढ़कर 490.42 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। यानी लगभग 12.65 प्रतिशत की बढ़ोतरी। हालांकि यह वृद्धि तंबाकू उत्पादों की कुल गिरावट की भरपाई नहीं कर सकी।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि मोबाइल उपकरण, उर्वरक, निर्माण अनुबंध और दूरसंचार जैसे बड़े क्षेत्रों में गिरावट ने कुल कर संग्रह को प्रभावित किया है। इन क्षेत्रों की सुस्ती के बावजूद वाहनों, इलेक्ट्रॉनिक सामान, विद्युत सामग्री, उपभोक्ता वस्तुएं, बीमा-बैंकिंग और खाद्य तेल जैसे सेक्टरों की तेजी ने राजस्व को मजबूत आधार प्रदान किया। चार पहिया वाहनों का कर संग्रह 5686.26 करोड़ से बढ़कर 5895.26 करोड़ रुपये तक पहुंचा, जबकि दोपहिया वाहनों में 1933.72 करोड़ से बढ़कर 2058.17 करोड़ रुपये की वृद्धि हुई। इसी तरह दैनिक उपभोग की वस्तुओं और विद्युत उपकरणों ने भी लगातार बढ़त दर्ज की।

रिपोर्ट में सबसे तेज उछाल रत्न और आभूषण क्षेत्र में देखने को मिला, जहां कर संग्रह 427.27 करोड़ से बढ़कर 558.97 करोड़ रुपये पहुंच गया। इलेक्ट्रॉनिक सामान ने भी 1097.27 करोड़ से बढ़कर 1239.96 करोड़ का आंकड़ा छूते हुए मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई। बीमा और बैंकिंग क्षेत्रों में भी 12 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई, जबकि खाद्य तेल और शीतल पेय की श्रेणियों ने भी बेहतर प्रदर्शन किया।

राज्यकर विभाग का कहना है कि गिरावट वाले क्षेत्रों के लिए नीतिगत सुधार और व्यापारिक माहौल बेहतर बनाने की जरूरत है, जबकि तेजी दिखा रहे क्षेत्रों से आने वाले वित्तीय वर्ष में भी राजस्व वृद्धि की उम्मीद की जा रही है। विभाग ने माना कि कुछ प्रमुख सेक्टरों की सुस्ती चिंता का विषय है, लेकिन मजबूत क्षेत्रों की बढ़त ने इस वर्ष के कुल राजस्व को सुरक्षित रख लिया है।

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