फर्रुखाबाद। जनपद के कायमगंज क्षेत्र के लालपुर पट्टी गांव में स्थित तालाब इन दिनों पूरी तरह बदहाली का शिकार बना हुआ है। तालाब में चारों ओर गंदगी का अंबार लगा है, जिससे न सिर्फ जल स्रोत दूषित हो रहा है बल्कि आसपास के लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से तालाब की सफाई नहीं कराई गई है। तालाब में कूड़ा-करकट, प्लास्टिक, नाली का गंदा पानी और सड़ी-गली सामग्री जमा हो चुकी है, जिससे पानी काला पड़ गया है और उससे तेज दुर्गंध उठ रही है। हालात यह हैं कि तालाब अब जलस्रोत कम और कचरा स्थल अधिक नजर आने लगा है।
गंदगी के चलते तालाब मच्छरों का प्रमुख प्रजनन स्थल बन गया है। क्षेत्र में डेंगू, मलेरिया और वायरल बुखार जैसी बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों और बुजुर्गों में बीमारियां तेजी से फैल रही हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग पूरी तरह निष्क्रिय बना हुआ है।
इस गंभीर स्थिति के बीच यह भी उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया समय-समय पर जलस्रोतों, तालाबों और जलाशयों के संरक्षण को लेकर सख्त निर्देश दे चुका है। न्यायालय ने स्पष्ट कहा है कि तालाबों पर अतिक्रमण, गंदगी और उपेक्षा न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है बल्कि यह आम जनता के जीवन और स्वास्थ्य के अधिकार का उल्लंघन भी है।
वहीं केंद्र और राज्य सरकारें भी समय-समय पर तालाबों के संरक्षण और पुनर्जीवन को लेकर योजनाएं चलाती रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा सहित विभिन्न योजनाओं के माध्यम से तालाबों की खुदाई, सफाई और सौंदर्यीकरण के निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इन योजनाओं का क्रियान्वयन अक्सर सवालों के घेरे में रहता है।
लालपुर पट्टी का यह तालाब भी प्रशासनिक उदासीनता का उदाहरण बन गया है, जहां न तो नियमित सफाई हो रही है और न ही किसी प्रकार की निगरानी। ग्रामीणों ने कई बार शिकायत की, लेकिन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों की मांग है कि तालाब की तत्काल सफाई कराई जाए, उसमें जमा गंदगी हटाई जाए और नियमित देखरेख की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोबारा न हो।
बदहाल तालाब बना बीमारी का घर: गंदगी से मच्छरों का बढ़ता प्रकोप


