मंत्री-विधायक में भाई भाई का रिश्ता, मीडिया बढ़ा रही है बात
लखनऊ| बीते दिनों उत्तर प्रदेश सरकार के जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और महोबा जनपद की चरखारी विधानसभा से विधायक बृजभूषण शरण राजपूत के बीच जल जीवन मिशन के अधूरे कार्यों को लेकर सड़क पर हुई बहस ने सियासी हलकों में हलचल पैदा कर दी। यह घटनाक्रम महोबा में उस समय सामने आया, जब जल जीवन मिशन के तहत चल रहे कार्यों की प्रगति को लेकर दोनों नेता आमने-सामने आ गए। मौके पर हुई नोकझोंक का वीडियो और बयान सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे, जिसके बाद दोनों पक्षों के समर्थक भी खुलकर आमने-सामने आ गए और मामला तूल पकड़ने लगा।
मामले के बढ़ने के बाद विधायक बृजभूषण शरण राजपूत के पिता और पूर्व सांसद गंगा चरण राजपूत मीडिया के सामने आए और पूरे विवाद पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि मीडिया इस पूरे घटनाक्रम को बेवजह तूल दे रही है और “तिल का ताड़” बनाया जा रहा है। गंगा चरण राजपूत ने कहा कि जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह उनके बड़े बेटे के समान हैं और वह उनके गार्जियन भी हैं, जबकि विधायक बृजभूषण शरण राजपूत उनके छोटे बेटे हैं। उन्होंने कहा कि यदि छोटा बेटा गलती करता है तो बड़े को पूरा हक है कि वह उसे समझाए, डांटे, यहां तक कि जरूरत पड़े तो थप्पड़ भी मारे और कान भी ऐंठे।
पूर्व सांसद ने यह भी स्पष्ट किया कि विधायक बृजभूषण शरण राजपूत को भाजपा में लाने वाले और राजनीति का ककहरा सिखाने वाले स्वयं स्वतंत्र देव सिंह ही हैं। उन्होंने कहा कि जनता की समस्याएं यदि विधायक मंत्री के सामने रखता है तो इसमें कोई बुराई नहीं है। विधायक जनता की आवाज है और मंत्री तक बात पहुंचाना उसका कर्तव्य है। उन्होंने दो टूक कहा कि मंत्री और विधायक के बीच छोटे-बड़े भाई का रिश्ता है, इसे टकराव या विवाद के रूप में देखना गलत है।
गंगा चरण राजपूत ने जल शक्ति मंत्री की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि स्वतंत्र देव सिंह एक सख्त और ईमानदार मंत्री हैं। जल जीवन मिशन जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और आने वाले समय में लापरवाह अधिकारियों व ठेकेदारों पर कड़ी कार्रवाई देखने को मिलेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि मंत्री के सख्त रुख से योजनाओं की गति तेज होगी और जनता को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य समय पर पूरा किया जाएगा।
पूर्व सांसद के बयान के बाद यह संदेश देने की कोशिश की गई कि यह पूरा मामला पारिवारिक और संगठनात्मक मर्यादाओं के भीतर का है, न कि किसी बड़े राजनीतिक टकराव का। उन्होंने अपील की कि इस विषय को अनावश्यक राजनीतिक रंग न दिया जाए और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को सफल बनाने पर ध्यान दिया जाए।






