स्वास्थ्य सेवाओं में ऐतिहासिक निवेश: 1 लाख करोड़ रुपये से बेहतर स्वास्थ्य संरचना और अत्याधुनिक सुविधाएं

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लखनऊ| प्रदेश सरकार ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर, अधिक सुलभ और आधुनिक बनाने के लिए एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक निवेश की घोषणा की है। सरकार ने इस योजना के तहत कुल 1 लाख करोड़ रुपये खर्च करने का निर्णय लिया है, जो राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र में अब तक का सबसे बड़ा निवेश माना जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य राज्य के प्रत्येक नागरिक को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना और स्वास्थ्य प्रणाली को तकनीकी रूप से मजबूत बनाना है।

योजना के तहत अस्पतालों का आधुनिकीकरण, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता बढ़ाना, स्वास्थ्य कर्मियों का प्रशिक्षण और उनके कौशल को उन्नत करना शामिल है। सरकार का विशेष ध्यान ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर है। इससे न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम राज्य में स्वास्थ्य और चिकित्सा क्षेत्र को दीर्घकालिक रूप से सुदृढ़ करेगा और लोगों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव लाएगा।

इस योजना के संदर्भ में आयोजित हितधारक सम्मेलन में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, “हमारा संकल्प है कि वर्ष 2047 तक राज्य की 25 करोड़ जनता को उनके घर के पास ही वही अत्याधुनिक और समान गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं मिलें, जो आज केवल महानगरों में उपलब्ध हैं। हम स्वास्थ्य सेवाओं में समान वितरण और सभी नागरिकों के लिए समान स्वास्थ्य अधिकार सुनिश्चित करना चाहते हैं।”

सरकार की इस पहल के तहत प्रत्येक जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा। डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड, उच्च गुणवत्ता वाली जांच एवं डायग्नोस्टिक सुविधाएं, आपातकालीन सेवाओं का उन्नयन और दूरदराज के क्षेत्रों में मोबाइल स्वास्थ्य इकाइयों की व्यवस्था भी शामिल है। इससे ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में भी मरीजों को बेहतर और समय पर उपचार मिलेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस निवेश से राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर न केवल सुधार होगा, बल्कि उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य क्षेत्र में राष्ट्रीय मानकों के अनुसार अग्रणी राज्य बन जाएगा। साथ ही, चिकित्सा शिक्षा, प्रशिक्षण और शोध को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे लंबी अवधि में स्वास्थ्य कर्मियों की संख्या और गुणवत्ता में सुधार होगा।

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