नई दिल्ली| सोमवार को पूरे देश में स्वामी विवेकानंद की 163वीं जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले स्थित रामकृष्ण मठ एवं मिशन के मुख्यालय बेलूर मठ में सुबह मंगल आरती और विशेष प्रार्थनाओं के साथ कार्यक्रमों की शुरुआत हुई। स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को तत्कालीन कलकत्ता में नरेंद्रनाथ दत्ता के रूप में हुआ था और उनकी जयंती को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। रामकृष्ण मठ और मिशन की विभिन्न शाखाओं ने राज्य के अलग-अलग हिस्सों में जुलूस और कार्यक्रम आयोजित किए, जिनमें बड़ी संख्या में छात्र शामिल हुए।
इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वामी विवेकानंद को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने भारतीयों में राष्ट्रीय गौरव का संचार किया और युवाओं को राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद एक कालजयी दूरदर्शी थे, जिन्होंने आंतरिक शक्ति और मानवता की सेवा को सार्थक जीवन की नींव बताया और भारत के शाश्वत ज्ञान को विश्व तक पहुंचाया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में कहा कि स्वामी विवेकानंद भारतीय युवाशक्ति के महान प्रेरणास्रोत हैं और उनका व्यक्तित्व व कृतित्व विकसित भारत के संकल्प को निरंतर ऊर्जा देता रहेगा। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद का विश्वास था कि युवा शक्ति ही राष्ट्र निर्माण की सबसे सशक्त आधारशिला है और भारतीय युवा अपने जोश और संकल्प से हर लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं।
गृह मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय युवा दिवस पर कहा कि स्वामी विवेकानंद ने युवाओं को भारत की ज्ञान परंपरा, दर्शन और आध्यात्मिकता से जोड़ा तथा रामकृष्ण मिशन के माध्यम से सामाजिक सेवा के आदर्श स्थापित किए।
पश्चिम बंगाल में उत्तरी कोलकाता स्थित स्वामी विवेकानंद के जन्मस्थान शिमला स्ट्रीट पर केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार और विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद के देशभक्ति, सामाजिक सेवा और सांप्रदायिक सद्भाव के आदर्श आज भी समाज को प्रेरणा देते हैं और उनके विचार सभी धर्मों के बीच सम्मान, एकता और प्रेम का संदेश देते हैं।





