
लखनऊ: शहर के ज़ोन-6 स्थित कन्हैया माधवपुर प्रथम में स्वच्छता व्यवस्था पूरी तरह बेपटरी हो चुकी है। गलियों-चौराहों पर जगह-जगह लगे कूड़े के ढेर, बजबजाती नालियाँ और नालों से निकाली गई सिल्ट व सिंगल-यूज़ प्लास्टिक ने पूरे रास्ते को अवरुद्ध कर दिया है। हालात ऐसे हैं कि पैदल चलना तक जोखिम भरा हो गया है। नालों के ऊपर बेतरतीब रखे पत्थर किसी भी समय बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि नगर निगम के सदन में कूड़े और नालों की बदहाली पर कोई सवाल नहीं उठता। क्या शहर से कूड़ा ख़त्म हो गया है? या फिर समस्याएँ सिर्फ़ काग़ज़ों तक सीमित हैं? स्वच्छता सर्वेक्षण 2025-26 में पहले स्थान के दावों के बीच पुराने लखनऊ और ज़ोन-6 के इलाक़ों की तस्वीर सच्चाई बयां कर रही है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि नगर निगम का कोई कर्मचारी नियमित सफ़ाई के लिए नहीं आता। कूड़े के ढेर और खुले नालों से मच्छर-मक्खियों का प्रकोप बढ़ रहा है, जिससे डेंगू, मलेरिया और पेट की बीमारियों का ख़तरा बना हुआ है। लोगों का आरोप है कि प्रशासन की नींद तभी खुलेगी जब गंभीर बीमारियाँ फैलेंगी।
गौरतलब है कि प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना कई बार इलाको का दौरा कर चुके है कूड़े के ढेर और नालों की सफ़ाई पर हो रही ढिलाई पर अपनी नाराज़गी भी व्यक्त कर चुके हैं, बावजूद इसके ज़मीनी हालात में कोई ठोस सुधार नहीं दिखता। सवाल यह भी है कि कार्यदायी संस्था और ज़िम्मेदार अधिकारी आखिर जवाबदेही से क्यों बच रहे हैं?
शहर की महापौर सुषमा खर्कवाल और नगर आयुक्त गौरव कुमार को चाहिए कि वे ऐसे इलाक़ों का औचक निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति समझें और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करें—ताकि स्वच्छता के दावे ज़मीन पर उतर सकें।


