
फर्रुखाबाद। विद्या भारती पूर्वी उत्तर प्रदेश द्वारा संचालित संस्कृति बोध अभियान के अंतर्गत सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, श्यामनगर में वंदना सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्रीय अभियान प्रमुख राजेन्द्र देव त्रिपाठी ने छात्र-छात्राओं और आचार्यों को संबोधित किया।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि संस्कृति की उपयोगिता और महत्ता तभी बनी रह सकती है, जब उसके मूल्यों को दैनिक जीवन के व्यवहार में उतारा जाए। भारतीय संस्कृति को उन्होंने सर्वसमावेशी बताते हुए कहा कि इसका उद्देश्य श्रेष्ठ मानवीय गुणों का विकास करना है।
उन्होंने कहा कि भारत प्राचीन काल से ही विश्वबंधुत्व, प्राणिमात्र के प्रति प्रेम और आत्मीयता का संदेश देता आया है। “आत्मवत् सर्वभूतेषु” और “सर्वे भवन्तु सुखिनः” जैसे विचार भारतीय जीवनदर्शन को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।
त्रिपाठी ने बताया कि विश्वमानवता और विश्वबंधुत्व की भावना भारतीय संस्कृति की ही देन है। समाज में बंधु-भाव और भगिनी-भाव को बढ़ावा देने के लिए कुरुक्षेत्र स्थित संस्कृति शिक्षा संस्थान के मार्गदर्शन में विद्यालयों और समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ा जा रहा है।
उन्होंने संस्कृति ज्ञान परीक्षा के बारे में जानकारी देते हुए अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि विद्यालयों के साथ-साथ अभिभावकों, शिक्षित नागरिकों, पूर्व छात्रों और मातृशक्ति को भी इस अभियान से जोड़कर लक्ष्य को व्यापक बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम में संकुल कन्नौज के संस्कृति बोध परियोजना प्रमुख चंदन लाल मिश्र, दीपक वर्मा, आकाश श्रीवास्तव, धर्मेंद्र द्विवेदी, प्रधानाचार्य रामकृष्ण बाजपेई सहित सभी आचार्यगण, अध्यापिकाएं, छात्र-छात्राएं और विद्यालय कर्मचारी उपस्थित रहे।


