कासगंज। अमांपुर कस्बे में एक दिल दहला देने वाली घटना ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया। यहां एक बंद मकान से एक ही परिवार के पांच सदस्यों के शव बरामद होने से सनसनी फैल गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आर्थिक तंगी और बेटे की गंभीर बीमारी से टूट चुके परिवार के मुखिया सत्यवीर (45) ने पहले अपनी पत्नी और तीन मासूम बच्चों की हत्या की और बाद में खुद फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस हृदयविदारक घटना ने गरीबी और मानसिक अवसाद की भयावह तस्वीर सामने ला दी है।
शनिवार शाम करीब साढ़े छह बजे पुलिस को सूचना मिली कि अमांपुर क्षेत्र में पेट्रोल पंप के पीछे किराए के मकान में रहने वाले सत्यवीर और उसके परिवार के लोग कई दिनों से बाहर नहीं दिखे। घर अंदर से बंद था और एक दरवाजे पर ताला भी लगा था। सूचना पर पहुंची पुलिस घर में प्रवेश नहीं कर सकी, जिसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर फॉरेंसिक टीम और डॉग स्क्वायड को बुलाया गया। वीडियोग्राफी कराते हुए दरवाजा कटवाया गया।
अंदर का दृश्य देख पुलिस और मौजूद लोग सन्न रह गए। सत्यवीर का शव छत के कुंदे से साड़ी के फंदे पर लटका मिला। पत्नी रामश्री (40) का शव फर्श पर पड़ा था, उसके गले पर निशान पाए गए। बड़ी बेटी प्राची (14), आकांक्षा (13) और बेटा गिरीश (10) मृत अवस्था में मिले। बच्चों के मुंह से झाग निकल रहा था, जबकि प्राची के मुंह से खून भी पाया गया। पुलिस के अनुसार प्रथम दृष्टया बच्चों को विषाक्त पदार्थ खिलाकर मारने की आशंका है।
घटना की जानकारी मिलते ही डीआईजी प्रभाकर चौधरी, जिलाधिकारी प्रणय सिंह और पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा मौके पर पहुंचे और निरीक्षण किया। डीआईजी ने बताया कि पड़ोसियों और परिजनों से पूछताछ में आर्थिक तंगी मुख्य कारण के रूप में सामने आई है। परिवार की मौत लगभग तीन दिन पहले होने की आशंका जताई जा रही है।
पड़ोसियों के अनुसार सत्यवीर करीब आठ वर्ष पूर्व अपने मूल गांव नगला भोजराज से अमांपुर आकर रहने लगा था। वह वेल्डिंग का काम करता था। पेट्रोल पंप के पीछे किराए के छोटे से मकान में एक दुकान के साथ पीछे 10×10 फीट के कमरे में परिवार रहता था। घर की हालत बदहाली की कहानी कह रही थी। तीन दिन से बंद मकान खोलने पर चूल्हा साफ मिला, आसपास कोई बर्तन या खाने-पीने का सामान नहीं था। घर में न तो राशन दिखाई दिया और न ही पके भोजन के कोई संकेत मिले।
सत्यवीर के चाचा गया प्रसाद ने बताया कि पहले से ही परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा था। हालात तब और बिगड़ गए जब बेटे गिरीश को न्यूरो संबंधी गंभीर बीमारी हो गई। उसके सिर की नसों में समस्या थी और इलाज पर भारी खर्च हो रहा था। कुछ दिन पहले ही सत्यवीर ने पड़ोसी से एक हजार रुपये उधार लिए थे। उसने कई लोगों से आर्थिक मदद मांगी, लेकिन पर्याप्त सहयोग नहीं मिला। बताया जा रहा है कि चार दिन पहले वह गांव भी मदद मांगने गया था, लेकिन निराश होकर लौटा। इसके बाद वह गहरे अवसाद में चला गया।
पुलिस के मुताबिक सत्यवीर ने घटना से पहले घर के दरवाजे अंदर से बंद कर लिए थे। आशंका है कि पत्नी की गला दबाकर हत्या की गई और बच्चों को जहर दिया गया। इसके बाद उसने खुद फांसी लगा ली। सभी शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और रिपोर्ट के आधार पर मौत के सटीक कारणों की पुष्टि होगी।
यह घटना न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि समाज के सामने कई सवाल भी खड़े करती है—क्या समय रहते आर्थिक और मानसिक सहारा मिलता तो यह परिवार बच सकता था? गरीबी, बीमारी और अवसाद की इस मार ने एक साथ पांच जिंदगियां निगल लीं। अमांपुर में मातम पसरा है और हर आंख नम है।






