नई दिल्ली: नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर है। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ऑफ़ इंडिया ने केंद्र सरकार और अंम्प्लॉय ‘ प्रोविडेंट फण्ड आर्गेनाईजेशन (ईपीएफओ) को कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) की वेतन सीमा में संशोधन पर चार महीने के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि लंबे
समय से वेतन सीमा में बदलाव न होना कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है।
याचिका में उठाया गया मुद्दा
यह आदेश डॉ. नवीन प्रकाश नौटियाल की याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिका में कहा गया कि वर्ष 2014 से ईपीएफ की वेतन सीमा ₹15,000 प्रतिमाह निर्धारित है, जबकि पिछले दस वर्षों में महंगाई और वेतन संरचना में बड़ा बदलाव आया है। इसके चलते बड़ी संख्या में कर्मचारी ईपीएफ कवरेज से बाहर हो गए हैं।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सवाल किया कि जब निजी क्षेत्र में प्रारंभिक वेतन ही ₹18,000 से ₹22,000 तक पहुंच चुका है, तो ईपीएफ की वेतन सीमा अब तक स्थिर क्यों है। अदालत ने सरकार को इस विषय में टालमटोल न करने की हिदायत दी। वेतन सीमा बढ़ने से अधिक कर्मचारियों को ईपीएफ का लाभ मिलेगा, रिटायरमेंट फंड मजबूत होगा और सामाजिक सुरक्षा में सुधार होगा। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि चार महीने के भीतर केंद्र सरकार और ईपीएफओ को निर्णय लेकर अदालत को अवगत कराना होगा। अब करोड़ों कर्मचारियों की नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी है।


