अमृतपुर फर्रुखाबाद: जनपद में कानून व्यवस्था (Law and order) को लेकर इन दिनों बड़ा बदलाव महसूस किया जा रहा है। आरती सिंह (Aarti Singh) के सख्त रुख के बाद कथित दलालों और बिचौलियों पर शिकंजा कसता नजर आ रहा है। लंबे समय से चली आ रही शिकायतों—रेप पीड़िता का मुकदमा दर्ज न करना, गरीब महिला को दहेज एक्ट में फंसाना तथा निर्दोष युवक पर हरिजन एक्ट लगाकर दबाव बनाने—जैसे गंभीर मामलों को लेकर पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अब किसी भी स्तर पर लापरवाही या कानून के दुरुपयोग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, पुलिस अधीक्षक द्वारा सभी थाना प्रभारियों को निर्देशित किया गया है कि पीड़ितों की शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर दर्ज कर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए। लंबित प्रकरणों की समीक्षा की जा रही है और थानों में पारदर्शिता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले कुछ मामलों में कथित दलालों की सक्रियता के कारण पीड़ितों को न्याय मिलने में बाधाएं आती थीं। सख्ती के बाद ऐसे तत्वों में हताशा देखी जा रही है। वहीं गरीब और वंचित वर्ग इस बदलाव को राहत के रूप में देख रहा है।
इसी बीच हाल ही में एक थाना अध्यक्ष की विदाई भी क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी रही। विदाई समारोह औपचारिक रूप से आयोजित हुआ, लेकिन आम जनमानस की उपस्थिति अपेक्षाकृत कम रही। कुछ कथित लोग ही थाना अध्यक्ष के साथ नजर आए। क्षेत्र में इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं।
जनता के बीच मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ लोगों ने इसे “राहत का दिन” बताया तो कुछ ने निजी बातचीत में कहा कि “आज हमारी रोजी-रोटी चली गई।” हालांकि विदाई समारोह भावनात्मक माहौल में संपन्न हुआ और थाना अध्यक्ष ने अपने कार्यकाल के अनुभव साझा किए।
प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि किसी भी जिले में पुलिस की निष्पक्षता और पारदर्शिता ही जनता के विश्वास की आधारशिला होती है। यदि शिकायतों का समयबद्ध और निष्पक्ष समाधान हो तो आमजन का भरोसा स्वतः मजबूत होता है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नई तैनाती के बाद व्यवस्था किस दिशा में आगे बढ़ती है। आम लोगों की अपेक्षा है कि न्याय और पारदर्शिता की यह पहल निरंतर जारी रहे।


