लखनऊ। सरकार द्वारा पारिवारिक सदस्यों के पक्ष में संपत्ति के दान विलेख पर स्टांप ड्यूटी में दी गई बड़ी छूट का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। आवासीय और कृषि संपत्तियों पर छूट मिलने के बाद परिवारों के बीच गिफ्ट डीड की संख्या में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है और अब व्यावसायिक व औद्योगिक संपत्तियों को भी इसी दायरे में लाने से यह आंकड़ा और बढ़ने की उम्मीद है। स्टांप एवं पंजीयन विभाग के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023 में जहां कुल 2,01,904 दान विलेख पंजीकृत हुए थे, वहीं वर्ष 2024 में यह संख्या बढ़कर 3,21,990 तक पहुंच गई, जबकि पिछले वर्ष 2,78,450 गिफ्ट डीड दर्ज किए गए थे।
राज्य सरकार ने तीन अगस्त 2023 को पारिवारिक सदस्यों के बीच आवासीय व कृषि संपत्ति के दान विलेख पर स्टांप ड्यूटी घटाकर मात्र पांच हजार रुपये करने का निर्णय लिया था। इस फैसले से पहले गिफ्ट डीड की संख्या बेहद कम रहती थी, लेकिन छूट लागू होते ही लोग बड़ी संख्या में पारिवारिक संपत्ति का हस्तांतरण दान विलेख के माध्यम से करने लगे। स्टांप एवं पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रवीन्द्र जायसवाल के अनुसार, इस अवधि में परिवार के बाहर किए गए दान विलेखों की संख्या 28 से 40 हजार के बीच ही सीमित रही, जबकि पारिवारिक दान विलेखों में अप्रत्याशित वृद्धि हुई।
अब सरकार ने व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियों के दान विलेख पर भी स्टांप ड्यूटी को पांच हजार रुपये तय कर दिया है। इससे व्यापारिक परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि अब वे भी कम खर्च में अपनी संपत्ति को अगली पीढ़ी या अन्य पारिवारिक सदस्यों के नाम कर सकेंगे। नियमों के तहत पुत्र, पुत्री, माता-पिता, पति-पत्नी, पुत्रवधू, सगा भाई-बहन, दामाद तथा पौत्र-पौत्री के पक्ष में किसी भी प्रकार की संपत्ति का गिफ्ट डीड करने पर केवल पांच हजार रुपये की स्टांप ड्यूटी और संपत्ति मूल्य का एक प्रतिशत निबंधन शुल्क देना होगा।
उल्लेखनीय है कि छूट से पहले संपत्ति की सेल डीड की तरह शहरी क्षेत्रों में सात प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में सर्किल रेट का पांच प्रतिशत स्टांप ड्यूटी देना पड़ता था, जिससे गिफ्ट डीड कराना महंगा सौदा साबित होता था। सरकार के इस फैसले को पारिवारिक विवादों में कमी, संपत्ति हस्तांतरण को सरल बनाने और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।




