हरदोई
आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। रविवार को तेज आंधी और ओलों के साथ हुई बारिश के बाद मंगलवार शाम को फिर मौसम बिगड़ गया, जिससे खेतों में कटी पड़ी फसलें पानी में डूब गईं। ओलावृष्टि के कारण गेहूं की बालियां टूटकर दाने जमीन में गिर गए, जिससे भारी नुकसान हुआ है।
किसानों का कहना है कि उनकी तैयार फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। जिन खेतों में कटाई हो चुकी थी, वहां फसल भीगकर खराब हो गई, जबकि खड़ी फसल को ओलों ने नुकसान पहुंचाया। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति पर गहरा असर पड़ने की आशंका है।
हालांकि, सरकारी आंकड़ों में नुकसान बेहद कम दिखाया जा रहा है। जिला प्रशासन को मिली रिपोर्ट के अनुसार बिलग्राम, सदर और शाहाबाद तहसीलों में 5 से 7 प्रतिशत से अधिक नुकसान दर्ज नहीं किया गया है। जबकि नियमों के अनुसार राहत राशि पाने के लिए कम से कम 30 प्रतिशत फसल नुकसान जरूरी होता है।
प्रशासनिक अधिकारियों का भी कहना है कि अभी तक बड़े स्तर पर नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है। शाहाबाद के एसडीएम और सवायजपुर के तहसीलदार ने अपने-अपने क्षेत्रों में भारी नुकसान से इनकार किया है। सदर तहसील प्रशासन ने भी स्पष्ट किया है कि निर्धारित सीमा से कम नुकसान होने पर राहत नहीं दी जा सकती।
दूसरी ओर, किसान खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। उनका आरोप है कि जमीनी हकीकत और सरकारी रिपोर्ट में बड़ा अंतर है। उनका कहना है कि फसल पूरी तरह चौपट हो गई है, लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है।
इस बीच फसल बीमा कंपनी के अनुसार, जिले के करीब 54 हजार बीमित किसानों में से बड़ी संख्या ने टोल फ्री नंबर 14447 पर नुकसान की सूचना दी है। कंपनी की ओर से सर्वे जारी है, हालांकि प्रारंभिक जांच में अधिकांश खेतों में नुकसान सीमित बताया जा रहा है। अब किसानों को सर्वे रिपोर्ट और संभावित मुआवजे का इंतजार है।


