कानपुर शहर और आसपास के इलाकों में शनिवार शाम आई तेज आंधी, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने भारी तबाही मचाई। करीब 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली तेज हवाओं ने शहर में 200 से अधिक पेड़ उखाड़ दिए। इस दौरान हुए अलग-अलग हादसों में चार लोगों की मौत हो गई, जबकि छह लोग घायल हो गए। कई दोपहिया और चारपहिया वाहन पेड़ों के नीचे दब गए और देर रात तक लगभग 30 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई।
आंधी के कारण बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। शहर में 100 से अधिक बिजली के खंभे गिर गए और तार टूट गए, जिससे शाम करीब पांच बजे से बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। देर रात तक शहर के कई हिस्सों में ब्लैकआउट की स्थिति बनी रही। केस्को की टीमों ने मरम्मत कर रात 10 बजे तक 70 उपकेंद्रों को चालू किया, लेकिन लगातार हो रही बारिश के चलते फॉल्ट दोबारा बढ़ते रहे।
रेल यातायात भी इस प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हुआ। दिल्ली-हावड़ा, कानपुर-झांसी और कानपुर-फर्रुखाबाद रेल रूट पर पेड़ गिरने और ओएचई लाइन ट्रिप होने से 22 से अधिक ट्रेनें रास्ते में फंस गईं। यात्रियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा और कई जगहों पर लंबा इंतजार करना पड़ा।
हादसों की बात करें तो काकादेव क्षेत्र में एक पेड़ चलते ऑटो पर गिर गया, जिसमें चालक सोनू (30) और सवार जमुना देवी (62) की मौत हो गई, जबकि दो अन्य घायल हो गए। कल्याणपुर में पेड़ गिरने से चार राहगीर घायल हुए। पनकी में एक युवक को वाहन ने टक्कर मार दी, वहीं एक अन्य युवक बाइक फिसलने के बाद ट्रक की चपेट में आ गया।
कृषि क्षेत्र में भी इस आंधी-बारिश का गंभीर असर पड़ा है। कृषि विभाग के अनुसार, गेहूं, चना और अरहर की फसलों को बड़े पैमाने पर नुकसान होने की आशंका है। मौसम विभाग ने अगले एक-दो दिन हल्के बादल और बूंदाबांदी की संभावना जताई है। वहीं, शहर में जलभराव और पेड़ गिरने के कारण कई इलाकों में देर रात तक भीषण जाम की स्थिति बनी रही।


