लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी (SP) ने सांसद असदुद्दीन ओवैसी (Owaisi) की पार्टी एआईएमआईएम से दूरी बनाए रखने का साफ संकेत दिया है। सपा नेतृत्व का कहना है कि प्रदेश में उसके मुस्लिम वोट बैंक को लेकर किसी तरह की आशंका नहीं है। पार्टी का मानना है कि एआईएमआईएम के आने या न आने से सपा के जनाधार पर कोई असर नहीं पड़ता।
यह बहस उस समय तेज हुई जब सपा सांसद रमाशंकर राजभर के एक बयान में कहा गया था कि भाजपा को हराने के लिए किसी भी पार्टी का साथ लिया जा सकता है। इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में सपा और एआईएमआईएम के संभावित गठबंधन को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई थीं। हालांकि, सपा के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने इन अटकलों पर विराम लगाते हुए स्पष्ट कहा कि समाजवादी पार्टी को ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम की कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि सपा हमेशा अपने दम पर सरकार बनाती आई है और आगे भी उसी रणनीति पर काम करेगी।
पार्टी नेताओं का तर्क है कि वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में एआईएमआईएम ने प्रदेश की 100 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन 99 सीटों पर उसकी जमानत जब्त हो गई थी। पार्टी को महज 0.4 प्रतिशत वोट ही मिले थे, जबकि इससे अधिक वोट नोटा को मिले थे। इन आंकड़ों के आधार पर सपा का मानना है कि उत्तर प्रदेश में मुस्लिम मतदाता एआईएमआईएम पर भरोसा नहीं करता।
सपा के एक जिम्मेदार नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पिछले चुनावों के अनुभव से यह स्पष्ट है कि ओवैसी के मैदान में उतरने से भाजपा विरोधी वोटों का बिखराव होता है, जिसका सीधा फायदा भाजपा को मिलता है। इसी वजह से पार्टी की रणनीति है कि ओवैसी और एआईएमआईएम के मुद्दे पर किसी भी तरह की चर्चा से दूरी बनाए रखी जाए। सपा नेतृत्व का मानना है कि अकेले दम पर चुनाव लड़कर ही पार्टी भाजपा को प्रभावी चुनौती दे सकती है।


