अमृतपुर हत्याकांड में पूर्व थानाध्यक्ष मोनू शाक्य निलंबित, विवेचक पर भी गिरी गाज
अमृतपुर/फर्रुखाबाद। अमृतपुर क्षेत्र में हुए चर्चित ओमवीर हत्याकांड में आखिरकार बड़ा खुलासा और कार्रवाई सामने आई है। करीब 7 माह 3 दिन तक न्याय के लिए भटकती रही पीड़िता की आवाज तब सुनी गई, जब मामला लगातार सुर्खियों में आया और ‘यूथ इंडिया’ ने इसे प्रमुखता से उठाया।
मामले में चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि ओमवीर की हत्या कर शव को आरोपी रामू के खेत में दफना दिया गया था। करीब 8 माह बाद खेत की खुदाई में शव बरामद होने से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई।
पीड़ित परिवार शुरू से ही हत्या की आशंका जताता रहा, लेकिन शुरुआती जांच में पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। नतीजा यह रहा कि पीड़िता दर-दर भटकती रही, लेकिन उसे न्याय नहीं मिला।
जब मामला मीडिया और उच्च अधिकारियों तक पहुंचा, तब गहन जांच कराई गई। जांच के दौरान आरोपी के खेत में खुदाई कराई गई, जहां से शव बरामद हुआ। इस खुलासे के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
मामले में लापरवाही सामने आने पर पुलिस अधीक्षक आरती सिंह ने कड़ा रुख अपनाते हुए तत्कालीन थानाध्यक्ष मोनू शाक्य को निलंबित कर दिया, वहीं विवेचक रवि सोलंकी के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
वहीं क्षेत्राधिकारी संजय वर्मा और थानाध्यक्ष रक्षा सिंह ने पोस्टमार्टम हाउस पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की और उन्हें न्याय का भरोसा दिलाया। अधिकारियों ने स्पष्ट कहा कि मामले में नामजद सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
पीड़ित परिवार का कहना है कि यदि शुरुआत में ही पुलिस ने गंभीरता दिखाई होती, तो उन्हें इतने लंबे समय तक न्याय के लिए भटकना नहीं पड़ता।
अपर पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ने बताया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और जल्द ही सभी आरोपियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाएगी।
यह मामला न केवल पुलिस की लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि जब मीडिया और पीड़ित की आवाज मिलती है, तो न्याय की राह बनती है।
7 माह 3 दिन तक न्याय को भटकती रही महिला, एसपी का बड़ा एक्शन


