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Tuesday, March 17, 2026

सॉरी बोल आया हूं, अब मेरा कुछ नहीं बिगड़ेगा, जिम्मेदारों से आशीर्वाद लेकर लौटे थानेदार (अवध नारायण)पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

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रिश्वत में 5 किलो सेम बीज (दालमोठ) में सेटिंग के बाद भी काम नहीं, सॉरी बोलकर बचने का दावा करने वाले थानेदार पर उठे बड़े सवाल

फर्रुखाबाद। थाना कमालगंज के प्रभारी निरीक्षक अवध नारायण पांडे एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। युवक के मारपीट और लहूलुहान जैसे गंभीर मामले में ढिलाई बरतने और रिश्वत के रूप में सेम के बीज लेने के आरोपों के बीच अब उनका एक नया बयान सामने आया है, जिसने पूरे मामले को और भी तूल दे दिया है। सूत्रों के अनुसार, जिम्मेदार अधिकारियों से मुलाकात कर लौटने के बाद थाना प्रभारी ने अपने करीबियों के बीच यह कहकर चर्चा छेड़ दी कि आशीर्वाद लेकर आ गया हूं, सॉरी बोल दिया हूं, अब मेरा कोई नुकसान नहीं होगा।
यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब पहले से ही थाना कमालगंज पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। कादरी गेट क्षेत्र निवासी युवक अनिकेत कुमार के साथ हुई बर्बर मारपीट में उसके दोनों हाथ टूट गए, सिर में गंभीर चोटें आईं, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने न तो धाराएं बढ़ाईं और न ही आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की। उल्टा, पीड़ित पक्ष पर ही समझौते का दबाव बनाए जाने की बात सामने आई है।मामले ने तब और तूल पकड़ा जब पीड़ित के चाचा रवि कुमार ने थानेदार पर होली के नाम पर 10 किलो सेम के बीज मांगने का आरोप लगाया। आर्थिक तंगी के चलते 5 किलो बीज देने के बावजूद भी कोई कार्रवाई न होने का आरोप लगाया गया। इस कथित लेन-देन का ऑडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल बताया जा रहा है, जिससे पुलिस की साख पर गहरा सवाल खड़ा हो गया है।
अब थानेदार का सॉरी बोल आया हूं वाला बयान यह संकेत देता है कि पूरे प्रकरण को दबाने की कोशिशें अंदरखाने जारी हैं। इससे यह सवाल और गहरा गया है कि क्या वाकई जिम्मेदार अधिकारियों का संरक्षण उन्हें मिल रहा है या फिर यह महज दबाव से बचने की रणनीति है।
हालांकि पुलिस अधीक्षक आरती सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच करा रही है। लेकिन जिस तरह से आरोपी थानेदार खुलेआम अपने बचाव का दावा करता नजर आ रहा है, उससे निष्पक्ष जांच पर भी सवाल उठने लगे हैं।
पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है, लेकिन अब पूरा मामला सिर्फ मारपीट या रिश्वत तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि यह पुलिस महकमे की कार्यशैली और जवाबदेही पर सीधा सवाल बन गया है।

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