स्मार्ट मीटर में बड़ा घोटाला : कंपनियों पर मनमानी वसूली के आरोप, उपभोक्ता परिषद ने सीबीआई जांच की उठाई मांग

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लखनऊ| प्रदेश में इन दिनों बिजली मीटरों को बदलने और नए स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने का काम तेज गति से चल रहा है, लेकिन इसी बीच इस परियोजना में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप तेजी से उभर रहे हैं। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने लखनऊ में प्रेस वार्ता कर कंपनियों पर बड़े पैमाने पर मनमानी और घोर अनियमितताओं का आरोप लगाया है।

उन्होंने बताया कि मध्यांचल और पश्चिमांचल विद्युत वितरण कंपनियों ने जिन स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को 2630 रुपये से 2825 रुपये प्रति मीटर की दर से खरीदा है, उन्हीं मीटरों का मूल्य उपभोक्ताओं पर 6016 रुपये तक थोप दिया जा रहा है। वर्मा के मुताबिक यह सीधा-सीधा वित्तीय घोटाला और उपभोक्ताओं के साथ धोखाधड़ी है, जिसकी जांच सीबीआई से कराई जानी चाहिए।

अवधेश वर्मा ने यह भी खुलासा किया कि केंद्र सरकार ने पूरे उत्तर प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगाने के लिए 18,885 करोड़ रुपये की परियोजना को मंजूरी दी थी। लेकिन, प्रदेश में निजी कंपनियों को दिए गए टेंडरों की कुल राशि 27,342 करोड़ रुपये तक पहुँच गई है, जो परियोजना लागत से कहीं अधिक है। यह अंतर अपने आप में गंभीर सवाल खड़ा करता है कि आखिर अतिरिक्त धनराशि किस आधार पर स्वीकृत की गई।

परिषद अध्यक्ष ने बताया कि प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर की आपूर्ति का काम जिम्मेदारी के तहत इनटैली स्मार्ट कंपनी को मिला, जिसने आगे दो अन्य कंपनियोंएप्पल टोन इंजीनियर्स लिमिटेड और सानायीडर को सप्लाई का आदेश दिया। इन कंपनियों ने अपने इनवॉयस में सिंगल फेज स्मार्ट प्रीपेड मीटर की कीमत क्रमशः 2630 रुपये और 2825 रुपये दर्शाई है। इसके बावजूद पावर कॉरपोरेशन ने विद्युत नियामक आयोग के समक्ष स्मार्ट मीटर का मूल्य 7000 से 9000 रुपये प्रति मीटर तक बताया है।

उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष का कहना है कि यह अंतर केवल मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता की कमी नहीं दर्शाता, बल्कि यह स्पष्ट रूप से उपभोक्ताओं पर आर्थिक बोझ डालने का प्रयास है। उन्होंने आरोप लगाया कि निजी कंपनियों और कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से परियोजना की लागत बढ़ाई गई, जिससे सार्वजनिक धन का दुरुपयोग हुआ है।

उन्होंने कहा कि यदि इस मामले की स्वतंत्र और गहन जांच न कराई गई, तो स्मार्ट मीटर परियोजना एक बड़े वित्तीय घोटाले में बदल सकती है। उपभोक्ता परिषद ने मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री से आग्रह किया है कि वे मामले की सीबीआई जांच की संस्तुति करें, ताकि आम उपभोक्ता को न्याय मिल सके और वास्तविक दोषियों की जवाबदेही तय हो सके।

प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगाए जाने की प्रक्रिया भले ही तेजी से चल रही हो, लेकिन इन आरोपों ने निश्चित रूप से परियोजना की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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