– सवर्ण बनाम ओबीसी की बहस के दौर में सांसद मुकेश राजपूत ने निभाया मानवता का धर्म
– नरेंद्र तिवारी को एम्स में मिली कैंसर से निजात सफल हुआ ऑपरेशन
नई दिल्ली, फर्रुखाबाद। देश और प्रदेश की राजनीति जहां इन दिनों सवर्ण बनाम ओबीसी की तीखी बहस में उलझी हुई है, वहीं इसी माहौल के बीच इंसानियत की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने राजनीति के शोर से ऊपर मानवता को खड़ा कर दिया है। फर्रुखाबाद के सांसद मुकेश राजपूत की पहल से गंभीर मुख कैंसर से जूझ रहे 60 वर्षीय मरीज नरेंद्र तिवारी को नई जिंदगी मिली है।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ऐम्स न्यू दिल्ली में नरेंद्र तिवारी का सफल इलाज और जटिल सर्जरी कराई गई। मरीज को 14 मई 2024 को एम्स के ओटोराइनोलैरिंजोलॉजी एवं हेड एंड नेक सर्जरी विभाग में भर्ती कराया गया था। जांच में उनके बाएं निचले मसूड़े में कैंसर की पुष्टि हुई थी, जिसमें लगभग 40 मिमी का ट्यूमर पाया गया।
20 मई 2024 को एम्स में मरीज की जनरल एनेस्थीसिया के तहत जटिल सर्जरी की गई।
25 मई 2024 को मरीज को स्वस्थ स्थिति में डिस्चार्ज कर दिया गया।
मरीज नरेंद्र तिवारी ने स्वयं बताया कि इस पूरे इलाज में उन्हें फर्रुखाबाद सांसद मुकेश राजपूत का निर्णायक सहयोग मिला। दिल्ली एम्स तक पहुंचने से लेकर इलाज की प्रक्रिया को आसान बनाने तक सांसद ने हर स्तर पर मदद की। नरेंद्र तिवारी का कहना है कि यदि समय पर यह सहयोग न मिलता, तो इलाज संभव नहीं हो पाता।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब देश में जातीय पहचान को लेकर बहसें तेज हैं—कहीं ओबीसी बनाम सवर्ण, कहीं आरक्षण और प्रतिनिधित्व को लेकर राजनीतिक टकराव। लेकिन इसी पृष्ठभूमि में सांसद मुकेश राजपूत की यह भूमिका एक स्पष्ट संदेश देती है कि
राजनीति से बड़ी इंसानियत होती है। जनप्रतिनिधि का असली धर्म किसी वर्ग या जाति की राजनीति नहीं, बल्कि संकट में फंसे इंसान की मदद करना है।






