नई दिल्ली। लोकसभा में जी राम जी बिल 2025 पर हुई चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस ने हमेशा जनकल्याणकारी योजनाओं के नाम महात्मा गांधी के बजाय नेहरू परिवार के नाम पर रखने को प्राथमिकता दी। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस राजनीति के लिए महापुरुषों के नामों का इस्तेमाल करती रही है, जबकि वर्तमान सरकार गांवों के वास्तविक विकास और गरीबों के सशक्तिकरण पर केंद्रित है।
बिल पर चर्चा के दौरान विपक्षी सदस्यों ने इस योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाए जाने को लेकर गहरी चिंता जताई। विपक्ष का कहना था कि ग्रामीण रोजगार से जुड़ी योजना को महात्मा गांधी के नाम से अलग करना उनके विचारों और योगदान का अपमान है। इस मुद्दे पर विपक्षी सांसदों ने सदन में जोरदार नारेबाजी की और “महात्मा गांधी का अपमान नहीं सहेगा” जैसे नारे लगाए, जिससे कुछ समय के लिए सदन की कार्यवाही भी बाधित हुई।
वहीं सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि जी राम जी बिल 2025 किसी व्यक्ति या नाम से नहीं, बल्कि देश के गांवों और ग्रामीण जनता के भविष्य से जुड़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि इस बिल के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में 125 दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी दी जा रही है, जो अब तक की योजनाओं की तुलना में एक बड़ा कदम है। मंत्री ने कहा कि इस कानून के लागू होने से न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि गांवों के बुनियादी ढांचे, आजीविका और समग्र विकास को भी नई दिशा मिलेगी।
सरकार का कहना है कि यह बिल ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक मजबूत पहल है, जबकि विपक्ष इसे नाम बदलने और महात्मा गांधी की विरासत से जोड़कर देख रहा है। इस तरह जी राम जी बिल 2025 पर चर्चा ने संसद में राजनीतिक टकराव को और तेज कर दिया है।






