मैपिंग और SIR को लेकर सियासी घमासान तेज: अखिलेश यादव का सरकार पर बड़ा हमला

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नोएडा में बोले—“मैपिंग के बहाने हमारा आपका वोट काटने की तैयारी…SIR के बहाने NRC की साज़िश”

नोएडा। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने नोएडा में प्रेस वार्ता के दौरान केंद्र और यूपी सरकार पर सीधे निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में लागू की गई हाउसहोल्ड मैपिंग, घरेलू सर्वेक्षण और SIR (सोशल इकोनॉमिक रजिस्टर) जैसी योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य जनकल्याण नहीं, बल्कि राजनीतिक और चुनावी लाभ उठाना है।
अखिलेश यादव ने कहा:  “यह मैपिंग के बहाने हमारा आपका वोट काटने जा रहे हैं और यह ऐप उस कंपनी ने बनाया है जिसने कभी भारतीय जनता पार्टी को चंदा दिया था।”
सूत्रों के अनुसार, जिस कंपनी को यह डेटा कलेक्शन ऐप बनाने का कॉन्ट्रैक्ट मिला है, उसने पिछले वर्षों में BJP को 42 लाख रुपये से अधिक का राजनीतिक चंदा दिया था।
डेटा कलेक्शन का पैमाना, उत्तर प्रदेश के 2.52 करोड़ परिवारों की मैपिंग का लक्ष्य, अब तक लगभग 1.18 करोड़ परिवार मैप हो चुके, स्मार्ट डिवाइस के जरिए दर्ज किए जा रहे 38 प्रकार के व्यक्तिगत डेटा, परिवार की आय, संपत्ति, जाति, बैंकिंग, सरकारी योजनाओं का लाभ—सभी जानकारी एक ही ऐप में राजनीतिक दलों का आरोप है कि यह पूरा डेटा चुनावी रणनीति और वोट टार्गेटिंग में उपयोग किया जा सकता है. यही डेटा NRC/NPR के लिए उपयोगी आधार बन सकता है, जिसकी वजह से विपक्ष चिंतित है।
SIR में अब तक यूपी में करीब 7.4 करोड़ नागरिकों की एंट्री हो चुकी है राजनीतिक दलों का आरोप है कि इतने विशाल डेटा कलेक्शन के पीछे राजनीतिक मंशा हो सकती है। चुनाव से पहले नागरिकों की विस्तृत प्रोफाइलिंग, ऐप बनाने वाली कंपनी का राजनीतिक फंडिंग से जुड़ा रिकॉर्ड, डेटा सुरक्षा पर कोई स्पष्ट कानून नहीं, NRC/NPR जैसे विवादित मॉडल से मिलती-जुलती प्रक्रिया, डिजिटल सर्वे के कारण गरीब और हाशिए के वर्गों पर अधिक प्रभाव सरकार का कहना है कि, यह सर्वे विकास योजनाओं की मॉनिटरिंग के लिए है।
नागरिकों के डेटा का दुरुपयोग नहीं होगा, SIR और NRC का कोई संबंध नहीं हालांकि विपक्ष लगातार सरकार पर डेटा हिंडोला और चुनावी फायदा लेने का आरोप लगाता रहा है।

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