एसआईआर अभियान में बड़े पैमाने पर नाम कटने की तैयारी, 15.44 करोड़ मतदाताओं में 2.91 करोड़ पर खतरा

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लखनऊ : उत्तर प्रदेश में निर्वाचन आयोग के निर्देश पर चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) अभियान अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। अभियान के दौरान सामने आए प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार राज्य के कुल 15.44 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं में से करीब 2.91 करोड़ के नाम मतदाता सूची से कटने के आसार हैं। इनमें अनुपस्थित, मृत, स्थानांतरित और डुप्लीकेट प्रविष्टियों वाले मतदाता शामिल हैं।

चुनाव आयोग यह सूची प्रमुख राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) को शुक्रवार, 12 दिसंबर को सौंपेगा। प्रदेश के 1,62,486 पोलिंग बूथों पर तैनात राजनीतिक दलों के लगभग 42 हजार बीएलए को बूथवार नाम कटने की सूची उपलब्ध कराई जाएगी। हर बूथ पर औसतन 179 मतदाताओं के नाम कटने की संभावना सामने आई है। बीएलओ और बीएलए संयुक्त रूप से इन प्रविष्टियों का सत्यापन करेंगे।

वर्ष 2003 की मतदाता सूची से अब तक 76 प्रतिशत मतदाताओं के रिकॉर्ड का मिलान हो चुका है, जबकि शेष रिकॉर्ड का सत्यापन जारी है। जिन मतदाताओं की प्रविष्टियां अनुपस्थित, मृत, स्थानांतरित या डुप्लीकेट पाई गई हैं, उनके विवरण राजनीतिक दलों के बीएलए को सौंपे जाएंगे और ये सूचियां सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों की वेबसाइटों पर भी सार्वजनिक की जाएंगी, ताकि प्रक्रिया पारदर्शी और त्वरित हो सके।

जिन मतदाताओं का नाम मतदाता सूची 2025 में शामिल नहीं है और जिनके पास गणना प्रपत्र नहीं पहुंचा, वे फार्म-6 भरकर पुनः मतदाता बन सकते हैं। वहीं जिनके पास गणना प्रपत्र आया था लेकिन वे उसे भर नहीं सके, वे भी फार्म-6 के साथ शपथ पत्र देकर आवेदन कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त एक जनवरी 2026 को 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवा भी फार्म-6 के माध्यम से पहली बार नाम जुड़वा सकेंगे।

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