चुनाव सुधारों पर सरकार बनाम विपक्ष की सीधी टक्कर
नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र के दूसरे सप्ताह पूरी तरह चुनाव सुधारों और एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रेविशन) को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच भारी टकराव से घिर गया। लोकसभा में सोमवार को जैसे ही चुनाव सुधारों पर चर्चा शुरू हुई, विपक्ष ने एसआईआर प्रक्रिया में अनियमितताओं और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के मुद्दे पर तीखा विरोध दर्ज कराया।
विपक्ष ने आरोप लगाया कि एसआईआर के बहाने मतदाता सूची में हेरफेर, वोट चोरी और अवैध रूप से नाम जोड़ने/हटाने जैसे गंभीर खतरे उत्पन्न हो रहे हैं। विपक्षी दलों ने दावा किया कि देश के कई राज्यों में एसआईआर के दौरान कई बीएलओ पर अत्यधिक दबाव और अव्यवस्था रही। वहीं सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि “मतदाता सूची को स्वच्छ और पारदर्शी” बनाने की ऐतिहासिक प्रक्रिया है।
चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक 2025 के विशेष गहन पुनरीक्षण में 9 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों में एसआईआर लागू है।
321 जिलों और 1,843 विधानसभा क्षेत्रों को कवर कर
कुल करीब 51 करोड़ मतदाता इस प्रक्रिया के दायरे में हैं।
सत्र के दौरान लोकसभा में कई बार शोर-शराबा हुआ और कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। सरकार ने स्पष्ट किया कि चुनाव सुधारों पर विस्तृत बहस के लिए वह पूरी तरह तैयार है, लेकिन एसआईआर पर “राजनीतिक भ्रम फैलाने” का आरोप विपक्ष पर लगाया।
दूसरी ओर, विपक्ष ने कहा कि देश की चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता दांव पर है और एसआईआर पर स्वतंत्र जांच तथा नई दिशानिर्देशों की जरूरत है। बहस के दौरान “वोट चोरी”, “सूची में हेरफेर” और “BLOs की मौत” जैसे मुद्दों पर भी सदन में जोरदार चर्चा हुई।
चुनाव सुधारों पर दस घंटे की बहस प्रस्तावित है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सदन में जारी भिड़ंत किसी सहमति की ओर जाती है या विवाद और गहरा होता है। देशभर की निगाहें इस मुद्दे पर संसद की अंतिम राय पर टिकी हैं।


