लखनऊ| उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित पंचायत चुनाव को लेकर प्रशासनिक और चुनावी तैयारियां अब लगभग पूरी हो चुकी हैं। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा कराई गई विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के समापन के बाद मतदाता सूची का आलेख प्रकाशन कर दिया गया है। इसे पंचायत चुनाव की दिशा में एक अहम और निर्णायक कदम माना जा रहा है, क्योंकि मतदाता सूची ही पूरे चुनावी तंत्र की आधारशिला होती है।
निर्वाचन आयोग के मुताबिक, प्रदेशभर के मतदाता 20 फरवरी तक अपनी प्रविष्टियों को लेकर दावा-आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। इस अवधि में नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, गलत प्रविष्टियों में संशोधन कराने और मृत अथवा स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाने का अवसर दिया गया है। इसके साथ ही जिला स्तर पर संभावित डुप्लीकेट मतदाताओं की पहचान और सत्यापन की प्रक्रिया भी कराई जाएगी, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना न रहे।
सभी दावों और आपत्तियों के निस्तारण के बाद मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 28 मार्च को किया जाएगा। इसी अंतिम सूची के आधार पर ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के चुनाव कराए जाएंगे। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार पंचायत चुनाव मई-जून के बीच संभावित हैं, हालांकि राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से अभी तक चुनाव कार्यक्रम को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा या संकेत जारी नहीं किया गया है।
इस बार निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव में मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। आयोग ने जिलाधिकारियों, उपजिलाधिकारियों, खंड विकास अधिकारियों और संबंधित निर्वाचन कर्मियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे इस प्रक्रिया को पूरी गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ संपन्न कराएं। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से न छूटे और अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न हो।
इसके अलावा आयोग ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर मतदाता जागरूकता अभियान चलाए जाएं। लोगों को मतदान के महत्व, अपने मताधिकार के प्रयोग और मतदाता सूची की जांच के प्रति जागरूक किया जाए। निर्वाचन आयोग की अपील है कि सभी मतदाता समय रहते अपनी जानकारी की जांच कर लें और यदि किसी प्रकार की त्रुटि पाई जाए तो तय समय-सीमा के भीतर दावा-आपत्ति अवश्य दर्ज कराएं, ताकि पंचायत चुनाव निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से संपन्न कराए जा सकें।






