लखनऊ| प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक खींचतान तेज हो गई है। एक दिन पहले वोट जुड़वाने के दावे से जुड़े भाजपा विधायक के बयान को लेकर समाजवादी पार्टी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए थे। इस पर अब चुनाव आयोग ने सपा के आरोपों का सीधे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जवाब देते हुए स्थिति स्पष्ट की है।
चुनाव आयोग ने सपा की पोस्ट का जवाब देते हुए लिखा कि सशंकित होने की कोई आवश्यकता नहीं है। आयोग के अनुसार संबंधित विधानसभा क्षेत्र में एक सप्ताह के भीतर वोटरों का नाम जोड़ने के लिए केवल 14,707 फॉर्म-6 ही दर्ज किए गए हैं। आयोग ने साफ किया कि 6 जनवरी 2026 को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के प्रकाशन के बाद से अब तक उस विधानसभा में एक भी नया वोट नहीं बढ़ा है। चुनाव आयोग ने कहा कि बिना तथ्यों की पड़ताल किए केवल किसी के बयान के आधार पर आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाना पूरी तरह अन्यायपूर्ण है।
दरअसल, समाजवादी पार्टी ने एक्स पर एक पोस्ट करते हुए भाजपा विधायक के बयान का हवाला दिया था, जिसमें कथित तौर पर यह कहा गया था कि एक हफ्ते में 18 हजार से ज्यादा वोट बढ़वा लिए गए हैं। इसी बयान को आधार बनाकर सपा ने चुनाव आयोग पर एसआईआर प्रक्रिया में बेईमानी का आरोप लगाया और पूरी चुनावी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए थे।
चुनाव आयोग के इस स्पष्टीकरण के बाद एसआईआर को लेकर चल रही सियासी बहस और तेज हो गई है। जहां आयोग ने आंकड़ों के जरिए आरोपों को खारिज किया है, वहीं विपक्ष लगातार प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहा है। फिलहाल यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

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