प्रशांत कटियार
सीतापुर के महमूदाबाद क्षेत्र में हालिया घटनाक्रम केवल शिक्षक ने बीएसए से मारपीट कर दी जैसी तुच्छ कहानी नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक दबाव, लापरवाह शिक्षकों और सिस्टम की विफलता का कड़वा सच है। प्रधानाध्यापक बृजेंद्र वर्मा पर आरोप लगाते हुए पूरे प्रदेश में उनकी छवि धूमिल करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन सच्चाई कुछ और ही है।मामले की शुरुआत हुई अवंतिका गुप्ता नामक शिक्षिका की लगातार अनुपस्थिति और हाजिरी संबंधी अनियमितताओं से। बच्चों और ग्रामीणों के अनुसार, शिक्षिका पढ़ाई में ध्यान नहीं देती थीं, केवल मेकअप करती थीं और समय से पहले स्कूल छोड़ देती थीं। इस लापरवाही के बीच प्रधानाध्यापक बृजेंद्र वर्मा ने बच्चों और स्कूल की पढ़ाई को बनाए रखने के लिए अपनी जिम्मेदारी निभाई। यही जिम्मेदारी उनके लिए अपराध बन गई।सीसीटीवी फुटेज और सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो ने पूरे मामले की असली तस्वीर पेश की है। बच्चों ने खुलेआम कहा कि प्रधानाध्यापक के रहते स्कूल में पढ़ाई और व्यवस्था ठीक रहती थी, जबकि शिक्षिका की गैरहाजिरी ने सब कुछ अस्त-व्यस्त कर दिया। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि शिक्षक केवल विद्यालय की भलाई और बच्चों की पढ़ाई की चिंता कर रहे थे।लेकिन सिस्टम की दुर्बलता और प्रशासनिक दमन ने स्थिति को और बदतर बना दिया। बीएसए द्वारा लगातार तीन साल और फिर दस साल का रिकॉर्ड मांगना, प्रधानाध्यापक को कार्यालय बुलाकर दबाव बनाना और मानसिक प्रताड़ना देना इस घटना की जड़ हैं। प्रधानाध्यापक ने केवल सच बोलने और बच्चों के हक में खड़े होने की हिम्मत दिखाई।ग्रामीणों और बच्चों ने साफ कर दिया कि प्रधानाध्यापक का कार्यकाल सुधारों और पढ़ाई के लिए समर्पित था, जबकि शिक्षिका की गैरहाजिरी और मनमानी छुट्टियों ने विवाद की आग को हवा दी। बच्चों का विरोध, स्कूल गेट पर प्रदर्शन और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो इस तथ्य को और उजागर कर रहे हैं कि बृजेंद्र वर्मा अपने फर्ज में सच्चे थे।सांसद राकेश राठौर और प्रधानाध्यापक की पत्नी सीमा वर्मा ने भी निष्पक्ष जांच की मांग की है। स्पष्ट है कि यह केवल “मारपीट” की घटना नहीं, बल्कि लंबे समय से जारी प्रशासनिक दमन और प्रताड़ना का परिणाम है।इस मामले में शासन और शिक्षा विभाग को शर्मसार होने की बजाय सच्चाई को सामने लाना चाहिए। एक शिक्षक जो बच्चों की भलाई और स्कूल की प्रतिष्ठा के लिए संघर्ष करता है, उसे निशाना बनाना न केवल अन्याय है, बल्कि पूरे शिक्षण तंत्र को नुकसान पहुंचाने वाली नीति है। वीडियो और ऑडियो क्लिप ने यह साबित कर दिया है कि सिस्टम की कमजोरी और लापरवाही ने बच्चों और शिक्षक दोनों को पीड़ा दी है।अब सवाल यही है क्या हम ऐसे शिक्षकों को शर्मसार होने देंगे, या उनके संघर्ष और बच्चों की पढ़ाई के हक में खड़े होंगे।






