बुढ़नामऊ ग्रामसभा में आयोजित
फर्रुखाबाद। ग्राम चौपाल केवल प्रशासनिक संवाद तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह शिक्षा और सामाजिक चेतना का सशक्त मंच भी बनी। इस चौपाल में नानक चंद्र, प्रधानाध्यापक, ने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य को लेकर एक प्रेरणादायक संदेश पत्र प्रस्तुत कर सभी का ध्यान आकर्षित किया।
प्रधानाध्यापक नानक चंद्र को यह संदेश पत्र जिलाधिकारी फर्रुखाबाद को पुलिस अधीक्षक फर्रुखाबाद एवं खण्ड शिक्षा अधिकारी की उपस्थिति में सौंपा गया। उनके पत्र का केंद्रबिंदु था—बच्चों की शिक्षा, नैतिक संस्कार, अनुशासन और सकारात्मक सोच। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि बचपन में सही मार्गदर्शन मिल जाए, तो ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे भी किसी से कम नहीं हैं।
नानक चंद्र का यह प्रयास यह दर्शाता है कि एक शिक्षक केवल पाठ पढ़ाने तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह समाज का मार्गदर्शक भी होता है।
उन्होंने प्रशासन से अपील की कि शिक्षा को केवल योजनाओं तक न रखकर, उसे जमीन पर प्रभावी रूप से लागू किया जाए, ताकि हर बच्चे को समान अवसर मिल सके।
चौपाल में उपस्थित अधिकारियों ने भी प्रधानाध्यापक नानक चंद्र की इस पहल की खुले मंच से सराहना की और कहा कि ऐसे शिक्षक ही शिक्षा व्यवस्था की असली ताकत हैं। प्रशासन ने भरोसा दिलाया कि बच्चों के हित और शिक्षा से जुड़े सुझावों को गंभीरता से लिया जाएगा।
ग्रामीणों के बीच भी नानक चंद्र की भूमिका की चर्चा रही। लोगों ने कहा कि जब शिक्षक आगे बढ़कर बच्चों और समाज के लिए आवाज उठाते हैं, तो गांव का भविष्य स्वतः मजबूत होता है।
बुढ़नामऊ ग्रामसभा की यह चौपाल, और उसमें प्रधानाध्यापक नानक चंद्र की सक्रिय भूमिका, जनपद के लिए एक प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आई है।





