नई दिल्ली। नए साल की शुरुआत के साथ ही केंद्र सरकार ने तम्बाकू उत्पादों पर कर (टैक्स) को लेकर बड़ा अपडेट जारी किया है। सरकार ने सिगरेट, बीड़ी, गुटखा और अन्य तम्बाकू उत्पादों पर उत्पाद शुल्क और कर संरचना में संशोधन किया है, जिसके चलते इनकी कीमतों में बढ़ोतरी होना तय माना जा रहा है। यह फैसला जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार तम्बाकू उत्पादों पर उत्पाद शुल्क में बढ़ोतरी की गई है जिससे सिगरेट और स्मोकलेस तम्बाकू पर कर का बोझ बढ़ा है।
राज्यों को भी स्थानीय स्तर पर अतिरिक्त टैक्स लगाने की छूट रहेगी
इस बदलाव के बाद बाजार में सिगरेट, गुटखा, खैनी और बीड़ी की खुदरा कीमतों में इजाफा देखने को मिल रहा है।
सरकार का कहना है कि तम्बाकू सेवन से होने वाली बीमारियों पर देश में हर साल हजारों करोड़ रुपये खर्च होते हैं। कैंसर, हृदय रोग और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों की बड़ी वजह तम्बाकू मानी जाती है।
इसी को देखते हुए मिनिस्ट्री ऑफ़ फाइनेंस और स्वास्थ्य विभाग ने तम्बाकू पर टैक्स बढ़ाने का फैसला किया है, ताकि लोगों को इसके सेवन से रोका जा सके।
तम्बाकू कारोबार से जुड़े व्यापारियों का कहना है कि लगातार टैक्स बढ़ाने से,अवैध तम्बाकू और तस्करी बढ़ सकती है,छोटे दुकानदारों का कारोबार प्रभावित होगा,
वैध बाजार को नुकसान पहुंचने की आशंका है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि तम्बाकू उत्पादों पर टैक्स बढ़ाना एक प्रभावी कदम है। इससे न केवल सेवन में कमी आती है, बल्कि लोगों को इसके दुष्परिणामों के प्रति जागरूक भी किया जा सकता है।

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