काठमांडू: नेपाल की राजनीति में एक बड़ा बदलाव सामने आया है, जहां हाल ही में संपन्न आम चुनावों के परिणामों ने पूरे सियासी परिदृश्य को बदलकर रख दिया है। चुनाव आयोग ने घोषणा की है कि 5 मार्च 2026 को हुए आम चुनाव के अंतिम नतीजे शुक्रवार को राष्ट्रपति को सौंपे जाएंगे।
इस चुनाव में प्रतिनिधि सभा की कुल 275 सीटों के लिए मतदान हुआ था। इनमें से 165 सीटों पर प्रत्यक्ष चुनाव के जरिए उम्मीदवार चुने गए, जबकि 110 सीटें अनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के तहत भरी गईं।
चुनाव के नतीजों में सबसे बड़ा उलटफेर राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी (RSP) के रूप में सामने आया है। पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 182 सीटें हासिल की हैं, जो बहुमत के आंकड़े 138 से काफी अधिक है।
RSP की इस प्रचंड जीत ने नेपाल की पारंपरिक राजनीति को झकझोर कर रख दिया है। लंबे समय से सत्ता में प्रभाव रखने वाली पार्टियां इस बार पिछड़ती नजर आईं।
नेपाली कांग्रेस, जो कभी देश की प्रमुख राजनीतिक ताकत मानी जाती थी, इस चुनाव में केवल 38 सीटों पर सिमट गई। यह उसके लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।
वहीं, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (यूएमएल) भी उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सकी और उसे मात्र 25 सीटों से संतोष करना पड़ा। अन्य छोटी पार्टियों का प्रदर्शन भी सीमित रहा।
इन नतीजों के साथ ही अब सरकार गठन की प्रक्रिया तेज होने वाली है। चुनाव आयोग द्वारा अंतिम परिणाम सौंपे जाने के बाद राष्ट्रपति नई सरकार बनाने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू करेंगे।
राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल के सामने अब नई सरकार के गठन की जिम्मेदारी होगी। वे बहुमत प्राप्त दल को सरकार बनाने का न्योता देंगे।
ऐसे में RSP के नेता बालेन शाह का नाम प्रधानमंत्री पद के लिए सबसे आगे चल रहा है। उनकी लोकप्रियता और पार्टी की जीत उन्हें इस पद का प्रबल दावेदार बनाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बालेन शाह प्रधानमंत्री बनते हैं, तो नेपाल की राजनीति में एक नई सोच और नए नेतृत्व का दौर शुरू हो सकता है।
अब पूरे देश की नजर इस बात पर टिकी है कि नई सरकार किस तरह की नीतियां अपनाती है और क्या वह जनता की उम्मीदों पर खरी उतर पाती है या नहीं।


