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Friday, January 23, 2026

मौनी अमावस्या पर संगम में स्नान से रोके जाने पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने अन्न-जल त्याग कर धरना पर बैठे

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प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज (Prayagraj) में माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या के अवसर पर संगम में स्नान करने को लेकर ज्योतिषपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद (Shankaracharya Avimukteshwarananda) सरस्वती से जुड़ा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले 24 घंटों से शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपने अनुयायियों के साथ अपने शिविर के बाहर धरना और भूख हड़ताल पर बैठे हैं।

उन्होंने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की, जिसमें मौनी अमावस्या पर पालकी से स्नान करने से रोके जाने के बाद उन्होंने कई आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उन्हें स्नान किए बिना ही अपने शिविर लौटना पड़ा और आरोप लगाया कि उन्हें जानबूझकर ऐसा करने से रोका गया। उन्होंने दावा किया कि उनके अनुयायियों ने किसी भी पुलिस बैरिकेड का उल्लंघन नहीं किया और प्रशासन द्वारा लगाए गए आरोप झूठे हैं। उन्होंने मांग की कि प्रशासन सीसीटीवी फुटेज जारी करे ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि गलती किसकी थी।

अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि यह महज़ विरोध प्रदर्शन नहीं है, बल्कि जब तक प्रशासनिक अधिकारी आकर उनसे माफी नहीं मांग लेते, तब तक वे अपने शिविर में प्रवेश नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि जब तक उन्हें पालकी के साथ पवित्र स्नान करने की अनुमति नहीं मिल जाती, तब तक वे अपने शिविर के बाहर ही रहेंगे। उन्होंने प्रशासन पर कई आरोप लगाए। उन्होंने पुलिस पर अपने शिष्यों और शिविर में मौजूद साधुओं की पिटाई करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रशासन को उन्हें सम्मानपूर्वक पवित्र स्नान करने देना चाहिए था, लेकिन इसके बजाय लोगों की पिटाई की गई, जिसे उन्होंने एक संत का घोर अपमान बताया।

उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक अधिकारी माफी नहीं मांगते और उन्हें स्नान करने की अनुमति नहीं देते, तब तक वे अपनी भूख हड़ताल समाप्त नहीं करेंगे। महत्वपूर्ण बात यह है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने यह भी कहा कि वे इस मामले को अदालत में ले जाएंगे और यदि आवश्यक हुआ तो अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएंगे।

उन्होंने कहा, “संतों और तपस्वियों का पुलिस ने अपमान किया और उनकी पिटाई की।” उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने बार-बार माइक्रोफोन का इस्तेमाल करके गलत सूचना फैलाई और झूठा दावा किया कि शंकराचार्य अपशब्दों का प्रयोग कर रहे थे। इस झड़प में 15 से अधिक लोग घायल हो गए, जिनमें से कई को मामूली चोटें आईं। तीन गंभीर रूप से घायल व्यक्तियों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। शंकराचार्य जी महाराज के शिष्यों और अनुयायियों ने जोर देकर कहा है कि वे महाराज जी के साथ शिविर के बाहर तब तक बैठे रहेंगे जब तक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आकर माफी नहीं मांग लेते। शंकराचार्य ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्वीट किया कि स्नान अनुष्ठान शांतिपूर्ण और सफल रहा।

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मुख्यमंत्री ने शंकराचार्य का अपमान नहीं देखा और इस झूठे बयान के लिए स्पष्टीकरण मांगा। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस प्रशासन ने बर्बरतापूर्ण कार्रवाई की और अधिकारियों ने शिष्यों पर हमला किया। उन्होंने आगे कहा कि शंकराचार्य तब तक शिविर में प्रवेश नहीं करेंगे जब तक प्रशासन स्वयं आकर माफी नहीं मांग लेता और यह सुनिश्चित नहीं कर लेता कि स्नान अनुष्ठान सम्मानपूर्वक संपन्न हो।

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