शाहजहांपुर। देश को आज़ादी दिलाने वाले अमर शहीदों के सम्मान पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। नगर निगम परिसर में स्थापित शहीदों की प्रतिमाओं को बुलडोजर से ढहाए जाने की घटना ने हर देशभक्त के मन को झकझोर कर रख दिया है।
जिन शहीदों की बदौलत हम आज खुली हवा में सांस ले रहे हैं, अपने परिवार का पालन-पोषण कर पा रहे हैं, उन्हीं की प्रतिमाओं के साथ इस तरह का व्यवहार बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। यह घटना न केवल शहीदों के अपमान की प्रतीक है, बल्कि समाज की संवेदनहीनता को भी उजागर करती है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद न तो प्रशासन की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने आई है और न ही किसी जनप्रतिनिधि या राजनेता ने इस पर खुलकर आवाज उठाई है। यह चुप्पी कई सवाल खड़े करती है—क्या शहीदों के सम्मान की जिम्मेदारी सिर्फ औपचारिक कार्यक्रमों तक ही सीमित रह गई है?
बताया जा रहा है कि जिन प्रतिमाओं को गिराया गया, उनमें महान क्रांतिकारियों जैसे पंडित राम प्रसाद बिस्मिल और अन्य शहीदों की मूर्तियां शामिल थीं, जो वर्षों से लोगों को देशभक्ति की प्रेरणा देती आ रही थीं।
स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर आक्रोश है और वे दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि शहीदों का सम्मान सिर्फ शब्दों में नहीं, बल्कि कर्मों में भी दिखना चाहिए।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या दोषियों पर कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी अन्य घटनाओं की तरह ठंडे बस्ते में चला
भाई जब इस विषय में नगर आयुक्त विपिन मिश्रा से बात करने की कोशिश की गई तो हमेशा तरह इस बार भी उन्होंने फोन नहीं उठाया ।


