कायमगंज, फर्रुखाबाद: साहित्यिक संस्था साधना निकुंज एवं अनुगूंज द्वारा हिंदी छायावाद युग (hindi shadowy era) की प्रमुख रचनाकार महादेवी वर्मा (Mahadevi Verma) की जन्म जयंती पर आयोजित संगोष्ठी में प्रोफेसर रामबाबू मिश्र रत्नेश ने कहा कि महादेवी के काव्य में परंपरा के साथ प्रगति और पुरातन के साथ नूतन का अभिनंदन है।
उन्होंने कहा कि विरह की व्यथा है तो प्रियतम के मिलन की प्रतीक्षा भी है। प्रकृति के सौंदर्य का सम्मोहन है तो मानवता का जयघोष भी है। गीतकार पवन बाथम ने कहा की हिंदी का छायावाद समस्त भाषा साहित्य में अपना सानी नहीं रखता । पूर्व अंग्रेजी प्रवक्ता वीएस तिवारी ने कहा कि हिंदी छायावाद के कवियों पर अंग्रेजी साहित्य के रोमांटिक रचनाकारों का सीधा प्रभाव है।
पूर्व प्रधानाचार्य एवं संस्कृत प्रवक्ता अहिवरन सिंह गौर ने कहा कि छायावादी कवियों की भाषा संस्कृत निष्ठ एवं परिमार्जित है। प्रसाद, पंत , निराला और महादेवी में से किसी ने भी विजातीय भाषाओं के शब्द प्रयोग नहीं किये । गोष्ठी में आचार्य शिवकांत शुक्ला , जेपी दुबे , शिक्षामित्र मंजू मिश्रा, यशवर्धन, अनुपम मिश्रा, कीर्ति दुबे, शिवकुमार दुबे आदि उपस्थित रहे।


