लखनऊ| कफ सीरप के अवैध कारोबार से जुड़े मामले की जांच के दौरान सुरक्षा एजेंसियों को हवाला के माध्यम से टेरर फंडिंग की गंभीर आशंका के संकेत मिले हैं। सूत्रों के अनुसार, इस नेटवर्क के तार केवल देश के भीतर ही नहीं, बल्कि खाड़ी देशों और बांग्लादेश तक फैले होने की संभावना जताई जा रही है। इसी कड़ी में विभिन्न सुरक्षा और जांच एजेंसियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सूचनाएं एकत्रित कर रही हैं, ताकि पूरे अवैध वित्तीय तंत्र का खुलासा किया जा सके।

जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि कफ सीरप मामले में आरोपितों को हवाला के जरिए मोटी रकम भेजी गई। इन पैसों को भेजने वालों में कुछ इस्लामिक संगठन भी शामिल बताए जा रहे हैं, जिनका नाम पहले भी संदिग्ध गतिविधियों और टेरर फंडिंग से जुड़ चुका है। एजेंसियां इस बात की गहन पड़ताल कर रही हैं कि यह धन केवल अवैध कारोबार के लिए इस्तेमाल किया गया या फिर इसके जरिए आतंकी गतिविधियों को भी अप्रत्यक्ष रूप से सहायता पहुंचाई गई।

सुरक्षा एजेंसियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि कफ सीरप के आरोपितों को इस फंडिंग के असली मकसद की जानकारी थी या नहीं। जांच अधिकारी यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या आरोपी जानबूझकर इस नेटवर्क का हिस्सा बने या फिर उन्हें केवल कारोबार के नाम पर पैसा मुहैया कराया गया। इसी आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।

बताया जा रहा है कि हवाला नेटवर्क के जरिए पैसा भेजने के लिए कई परतों वाला सिस्टम अपनाया गया, जिससे लेन-देन का सीधा स्रोत छिपा रहे। खाड़ी देशों और बांग्लादेश से मिलने वाली सूचनाएं इस पूरे नेटवर्क को जोड़ने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। एजेंसियों ने वहां के संबंधित अधिकारियों से भी संपर्क साधा है और संदिग्ध खातों, लेन-देन और संपर्कों की जानकारी मांगी गई है।

जांच एजेंसियों का मानना है कि यदि टेरर फंडिंग की पुष्टि होती है, तो यह मामला केवल अवैध कफ सीरप कारोबार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक बड़ा मामला बन सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में जांच का दायरा और बढ़ने तथा कई नई गिरफ्तारियों की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here