फर्रुखाबाद: सर्दी बढ़ने से फसलों में फंफूदीजनित रोगों के लगने की सम्भावना के चलते जिला कृषि अधिकारी (District Agriculture Officer) ने किसानों (farmers) को फसल की सुरक्षा के बारे में टिप्स दिए। उन्होंने कहा कि मौसम में उतार-चढ़ाव होने पर माहू, थ्रिप्स आदि कीटों के लगने की सम्भावना हो जाती है। इसलिए बोई गई फसलों में निरन्तर देख-रेख करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आलू की फसल में माहू, थ्रिप्स कीटों के नियंत्रण के लिए एजाडिरैक्टिन (नीम ऑयल) 0.15 प्रतिशत ई०सी० की 2 लीटर मात्रा प्रति हेक्टेयर के हिसाब से 500 से 600 लीटर पानी में घोल बनाकर छिडकाव कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि अगेती व पिछेती झुलसा के नियंत्रण के लिए मैंकोजेब 75 प्रतिशत डब्ल्यू०पी० की 2.5 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी अथवा कार्वेण्डाजिम 12 प्रतिशत मैकोजेब 63 प्रतिशत डब्ल्यू०पी० की 2 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी अथवा जिनेव 75 प्रतिशत डब्ल्यू०पी० की 2.5 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी के हिसाब से घोल बनाकर फसल पर छिडकाव करें। पिछेती झुलसा का प्रकोप तीव्र होने पर मेटाएक्सिल 4 प्रतिशत मैंकोजेब 64 प्रति० की 2.5 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी अथवा सायमोक्सानिल 8 प्रतिशत मैंकोजेब 64 प्रति० की 3 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी अथवा एजेस्ट्रोविन 18.2 प्रतिशत डिफेनोकोनाजोल 11.4 प्रतिशत एस०सी० की 1 एम०एल० मात्रा प्रति लीटर पानी अथवा कॉपरआक्सीक्लोराइड 50 प्रतिशत डब्ल्यू०पी० की 2ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी के हिसाब से घोल बनाकर छिडकाव करें।
उन्होंने बताया कि सरसों सरसों की फसल में माहू कीट के नियंत्रण के लिए एजाडिरैक्टिन 0.15 प्रतिशत ई०सी० (नीम ऑयल) की 2.5 लीटर मात्रा अथवा डाइमेथोएट 30 प्रतिशत ई०सी० की 1 लीटर मात्रा 600 से 750 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर के हिसाब से फसल पर छिडकाव करें। सरसों की फसल में मुख्य रूप से आल्टरनेरिया पत्ती धब्बा रोग लगता है जिसमें पत्तियों तथा फलियों पर गहरे कत्थई रंग के धब्बे बनते है जो गोल छल्ले के रूप में होते हैं। तीव्र प्रकोप होने पर यह छल्ले आपस में मिल जाते है जिससे पूरी पत्ती झुलस जाती है।


